मधुरापुर गांव का रहने वाला छात्र शिवेंदु कुमार इस घटना को यादकर आज भी सिहर उठता है।उसकी पीठ पर अब भी मौजूद पिटाई ये निशान, उसके साथ हुई बर्बरता की कहानी बयां कर रहे हैं। शिवेंदु के मुताबिक, ये घटना 12 मई की है, जब वो अपने भाई ऋतिक के साथ वैक्सीन लेने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शोकहारा जा रहे थे, लॉकडाउन के बीच रास्ते में कुछ पुलिस वालों ने उन्हें रोका, गालीगलौज और मारपीट की। इनमें तेघड़ा के सर्किल ऑफिसर परमजीत सिरमौर भी शामिल थे।

दोनों भाई किसी तरह वहां से निकले और वैक्सीन लगवाई।इसके बाद दोनों फिर पुलिस के पास पहुंचे और मारपीट की वजह पूछी। इसके बाद तो जैसे उनकी शामत आ गई।

पुलिस की बर्बरता का शिकार हुआ शिवेंदु इंसाफ की गुहार लगा रहा है। घटना के 13 दिन बाद भी उसकी हालत ठीक नहींहै और अब भी वो अपने दर्द का इलाज करा रहा है। हद तो ये है कि परमजीत सिरमौर ने दोनों भाइयों पर तेघड़ा थाना और फुलवड़िया थाना में विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज करा दी है। इनमें 307 जैसी गंभीर धारा भी शामिल है यानी दोनों परहत्या के प्रयास का मामला बना दिया गया है।

दोनों भाइयों ने भी सीओ के खिलाफ तेघड़ा थाने में शिकायत दी, लेकिन पुलिस नेकोई कार्रवाई नहीं की। पीड़ित छात्र चाहता है कि सीओ पर केस दर्ज हो, इस सिलसिले में हमने तेघड़ा सीओ का पक्ष जानने के लिए कई बार उनके संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

यहां आपको बता दें कि बेगूसराय में लॉकडाउन के दौरान पुलिस की बर्बरता की ये कोई पहली घटना नहीं है। 3 दिन पहले भी भीशहर की फल मंडी में एक दुकानवाले की पुलिस ने पिटाई कर उसका सिर फोड़ दिया था, जिसके बाद लगभग 2 घंटे तक दुकानदारों नेएनएच 31 जामकर हंगामा किया था।

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