1993 में जब इंटरनेट भारत और दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में बिल्कुल नया था, तब एक 10 वर्षीय लड़के ने AI.com नाम का डोमेन रजिस्टर कराया। उस समय “AI” यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोई लोकप्रिय शब्द नहीं था। न सोशल मीडिया था, न चैटबॉट्स का दौर। यह सिर्फ एक साधारण इंटरनेट एड्रेस जैसा नाम था, जिसकी कीमत भी बेहद मामूली थी।

आज वही डोमेन करीब 70 मिलियन डॉलर में बिक चुका है। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत 600 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है। यह सौदा केवल एक वेबसाइट नाम की बिक्री नहीं, बल्कि डिजिटल ब्रांडिंग की बदलती ताकत का उदाहरण है।

किसने खरीदा था AI.com?
AI.com को मलेशिया के टेक उद्यमी अरस्यान इस्माइल ने 1993 में रजिस्टर कराया था। उस दौर में डोमेन खरीदना सस्ता और आसान था। उन्होंने इसे शौक और तकनीकी रुचि के चलते लिया था। तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि “AI” शब्द आने वाले दशकों में टेक दुनिया की सबसे बड़ी पहचान बन जाएगा।

बीते वर्षों में इस डोमेन को अलग-अलग कंपनियों को अस्थायी रूप से लीज पर दिया गया, लेकिन स्वामित्व लंबे समय तक अरस्यान के पास ही रहा।
दोबारा पाने के लिए चुकाए करोड़ों
2025 में स्थिति तब बदली जब कुछ समय के लिए डोमेन उनके नियंत्रण से बाहर हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, AI.com का नियंत्रण वापस हासिल करने के लिए उन्हें लगभग 10 मिलियन डॉलर (करीब 80 करोड़ रुपये) खर्च करने पड़े।
यानी जिस डोमेन को कभी कुछ सौ रुपये में लिया गया था, उसे फिर से पाने के लिए भारी रकम चुकानी पड़ी। लेकिन तब तक AI पूरी दुनिया में एक बड़ा ट्रेंड बन चुका था और इसकी ब्रांड वैल्यू तेजी से बढ़ रही थी।

70 मिलियन डॉलर में हुई ऐतिहासिक डील
डोमेन को दोबारा हासिल करने के बाद 2026 में इसे करीब 70 मिलियन डॉलर में बेच दिया गया। खरीदार थे Crypto.com के सीईओ।
Crypto.com पहले से ही डिजिटल फाइनेंस और क्रिप्टो इंडस्ट्री में एक स्थापित नाम है। अब कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी कदम बढ़ा रही है। माना जा रहा है कि AI.com का उपयोग किसी नए AI प्लेटफॉर्म या सर्विस के लिए किया जा सकता है।

क्यों इतनी महंगी हुई AI.com की कीमत?
पिछले दो वर्षों में AI तकनीक ने जिस तरह दुनिया भर में विस्तार किया है, उसने इस शब्द को एक मजबूत ब्रांड बना दिया है। लोग AI से इमेज, वीडियो, कंटेंट और बिजनेस टूल्स तैयार कर रहे हैं। कंपनियां भी AI आधारित सेवाओं में निवेश बढ़ा रही हैं।
ऐसे में AI.com जैसा छोटा, स्पष्ट और याद रखने में आसान डोमेन किसी भी टेक कंपनी के लिए बेहद मूल्यवान संपत्ति बन जाता है। यह नाम भरोसा और पहचान दोनों देता है।

डिजिटल जमीन की नई कीमत
यह सौदा इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में डिजिटल ब्रांडिंग और डोमेन नेम्स की अहमियत और बढ़ेगी। जैसे रियल एस्टेट की कीमत समय के साथ बढ़ती है, उसी तरह इंटरनेट पर प्रीमियम नामों की कीमत भी आसमान छू सकती है।
AI.com की कहानी केवल एक सफल निवेश की दास्तान नहीं, बल्कि बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था की झलक भी है। आज जो नाम साधारण लगते हैं, कल वही करोड़ों की डिजिटल संपत्ति साबित हो सकते हैं।








