दीपोत्सव के छह दिन बाद सूर्य उपासना के महापर्व छठ पर गोमती के घाटों पर एक ओर जहां व्रतियों का जमावड़ा लगेगा तो दूसरी ओर आदि गंगा गोमती में खड़ी होकर व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। दूसरे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ 36 घंटे के निर्जला व्रत का समापन होगा। यह मुख्य पर्व भले ही 20 और 21 नवंबर को मनाया जाएगा, लेकिन नहायखाय से इसकी शुरुआत 18 नवंबर से शुरू हो जाएगी। इसके चलते 17 नवंबर को जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से सफाई अभियान चलाया जाएगा।

अखिल भारतीय भोजपुरी समाज की ओर से लक्ष्मण मेला स्थल के छठ घाट पर होने वाले छठ महोत्सव को सीमित कर दिया गया है। समाज के अध्यक्ष प्रभुनाथ राय ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते सिर्फ पूजा होगी। किसी भी तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे। उन्होंने लोगों से सरकार के बताए नियमों का पालन करने और शारीरिक दूरी बनाकर घरों के पास पार्कों में गड्ढा बनाकर पूजन करने की अपील की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से छठ पर अवकाश घोषित करने की भी मांग की है। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्तालगामी सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व की शुरुआत की थी। पूर्वांचल के प्रसिद्ध पर्व पर अवकाश की मांग पिछले कई वर्षो से उठ रही है।

अखिल भारतीय भोजपुरी समाज की ओर से 35 वर्षो से लगातार भव्य आयोजन किया जा रहा है। पहली बार बिना छठ गीतों की बयार के लोग सूर्य की उपासना करेंगे। बाजारों में इसे लेकर रौनक दिखने लगी है। सूप के साथ ही पूजन सामग्री को लेकर दुकानदार तैयारियों में जुट गए हैं। इसके अलावा मनकामेश्वर उपवन घाट पर महंत देव्या गिरि के सानिध्य में महापर्व मनाया जाएगा। ओम ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष धनंजय द्विवेदी के संयोजन में खदरा के शिव मंदिर घाट पर पूजन होगा। पक्का पुल के पास , झूलेलाल घाट, कुड़ियाघाट व पीएसी 35वीं बटालियन में पूजन होगा। मवैया के साथ ही मानसनगर के नई पानी की टंकी के पास , छोटी नहर भोलाखेड़ा के अलावा कई मुहल्लो व मंदिरों में कुंड बनाकर पूजन होगा।
Source : Dainik Jagran




