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अयोध्या मा’मले में SC के फैसले के खि’लाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल, जानें AIMPLB ने क्या कहा

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अयोध्या का राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद जमीन वि’वाद सोमवार को उस वक्त एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया, जब मुस्लिम पक्ष के मूल याचिकाकर्ता के प्रतिनिधियों ने पुनर्विचार याचिका दायर की। अयोध्या मामले में गत नौ नवंबर को शीर्ष अदालत का ऐतिहासिक फैसला आने के करीब तीन हफ्ते बाद जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। दो सौ सत्रह पन्नों की इस याचिका में याचिकाकर्ता ने संविधान पीठ के फैसले पर सवाल उठाए हैं। याचिका में मुस्लिम संगठनों का पक्ष दोबारा सुने जाने की मांग की गई है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम आज सुप्रीम कोर्ट के समक्ष (अयोध्या मामले में) रिव्यू पिटीशन दायर नहीं करेंगे। हमने रिव्यू पिटीशन तैयार कर ली है और हम इसे 9 दिसंबर से पहले किसी भी दिन फाइल कर सकते हैं। मौलाना सैयद अशद रशीदी ने बताया कि अयोध्या भूमि विवाद को लेकर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।

अयोध्या फैसले पर रिव्यू पिटीशन को लेकर बोले श्री श्री रविशंकर, यह मुस्लिम बोर्ड का दोहरा मानदंड

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के पुनर्विचार याचिका दायर करने के फैसले को आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने “दोहरा मानदंड” करार दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों को आगे बढ़ना चाहिए और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता समिति के सदस्य रहे आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि मामला काफी पहले सुलझा लिया गया होता, अगर एक पक्ष विवादित जगह पर मस्जिद बनाने पर न अड़ा रहता। भारत में मौजूदा आर्थिक संकट के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिये काफी कुछ किए जाने की जरूरत है।

श्री श्री रविशंकर ने एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा, “हां, मैं अयोध्या पर फैसले से खुश हूं। मैं 2003 से कह रहा हूं कि दोनों समुदाय इस पर काम कर सकते हैं…एक तरफ मंदिर बनाइए और दूसरी तरफ मस्जिद। लेकिन ये जिद की मस्जिद वहीं बनानी है, उसका कोई मतलब नहीं है।” श्री श्री शहर के नेताजी इंडोर स्टेडियम में लोगों को संबोधित करने पहुंचे थे, जहां उन्होंने नए कार्यक्रम “व्यक्ति विकास से राष्ट्र विकास” की भी घोषणा की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के लिये बेहद अच्छा निर्णय” बताया। उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने नौ नवंबर को एकमत से अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए केंद्र को निर्देश दिया था कि वह सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिये पांच एकड़ का भूखंड आवंटित करे।

इस फैसले को लेकर एआईएमपीएलबी द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करने की योजना के बारे में पूछे जाने पर आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि किसी भी फैसले से सभी लोग खुश नहीं हो सकते। ‘द आर्ट ऑफ लीविंग’ फाउंडेशन के संस्थापक ने कहा, “स्वाभाविक है, हर किसी को एक फैसले से खुश नहीं किया जा सकता, अलग-अलग लोगों की अलग राय होती है…जो लोग फैसले पर पुनर्विचार के लिये योजना बना रहे हैं वही लोग पहले कह रहे थे कि वे उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार करेंगे, उन्होंने अपना मन बदल लिया।”

Input : Hindustan

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- प्रवासी मजदूरों को घर भेजने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की

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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण देश में लॉकडाउन है। बंद के कारण से देश के कोने-कोने में रह रहे प्रवासी मजदूरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के पहले चरण से लेकर हाल तक दिल्ली, मुंबई जैसा महानगरों से प्रवासियों के पैदल घरवापसी की तस्वीरें सामने आती रही है। इतना ही नहीं घर लौटने के दौरान कई मजदूरों की विभिन्न दुर्घटनाओं में जान भी चली गई। हाल ही में रेल की पटरी पर सो रहे मजदूरों की ट्रेन से कटने से मौत हो गई थी। इस दर्दनाक घटना ने देश को झकझोर दिया था।

देश के विभिन्न भागों में फंसे प्रवासी मजदूरों की दयनीय हालत और उनकी समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को स्वत: संज्ञान लिया था। जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एमआर शाह ने केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजते हुए 28 मई तक जवाब देने के लिए कहा था। कोर्ट ने पूछा था कि उनकी स्थिति में सुधार के लिए आखिर क्या कदम उठाए गए हैं।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें इस बात की चिंता है कि प्रवासी मजदूरों को घर वापस जाने के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हमने नोटिस किया है कि रजिस्ट्रेशन की प्रकिया, ट्रांसपोटेशन के साथ-साथ उनके खाने-पीने के इंतजाम में काफी खामियां हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को घर भेजने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई 28 मई तय की थी। इस मामले पर आज सुनवाई जारी है। इस दौरान केंद्र ने कोर्ट से कहा कि अभी तक 91 लाख प्रवासियों को उनके घर भेजा जा चुका है। इनमें से 80 प्रतिशत के करीब बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं।

आपको बता दें कि प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए रेलवे लगातार ट्रेनें चला रही है। अभी तक लगभग 50 लाख मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया गया है। इसके साथ सही सरकार का कहना है कि उसने लाखों मजदूरों के खाते में पैसे भी भेजे हैं।

Input : Hindustan

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राहुल गांधी बोले- हिंदुस्तान के लोगों को आज कर्ज नहीं पैसे की जरूरत, गरीबों की 6 महीने मदद करे सरकार

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कोरोना वायरस महामारी (Covid-10 Pandemic) के चलते देश में 65 दिनों से लॉकडाउन लागू है. लॉकडाउन (Lockdown) की सीधी मार प्रवासी मजदूरों, गरीबों, कामगारों और जरूरतमंदों पर पड़ी है. ऐसे में कांग्रेस (Congress) की ओर से #speakupindia नाम से ऑनलाइन कैंपेन चलाया जा रहा है. इसके तहत हर नेता सोशल मीडिया पर अपनी मांगें रख रहा है. पहले सोनिया गांधी ने मोदी सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं. अब राहुल गांधी ने कहा कि आज हिंदुस्तान के लोगों को कर्ज की जरूरत नहीं है, बल्कि पैसे की जरूरत है. इसलिए सरकार अगले 6 महीने तक गरीबों की आर्थिक मदद करे.

गरीबों को पैसे चाहिए लोन नहीं

राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी किया है. उन्होंने कहा, ‘कोविड-19 के कारण देश में आज एक तूफान आया है, गरीब जनता को चोट लगी है. मजदूरों को भूखा-प्यासा सड़कों पर चलना पड़ रहा है. छोटे कारोबार अर्थ व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं, जो बंद हो रहे हैं. ऐसे में आज हिंदुस्तान के लोगों को कर्ज की जरूरत नहीं है, बल्कि पैसे की जरूरत है.’

राहुल गांधी ने मोदी सरकार से की ये चार मांग

  • हर गरीब परिवार के खाते में 7500 रुपये प्रति महीना 6 महीने तक दिया जाए.
  • मनरेगा को सौ दिन की बजाय दो सौ दिन तक किया जाए.
  • छोटे कारोबारियों के लिए एक पैकेज का ऐलान किया जाए.
  • घर लौटते हुए मजदूरों को सुविधा दी जाए.

 

6 महीनों के लिए 7500 रुपये दिए जाएं

राहुल ने कहा, ‘हमारी सरकार से चार मांगे हैं. पहली मांग यह है कि हर गरीब परिवार के खाते में छह महीनों के लिए 7500 रुपये प्रति माह डाला जाए. मनरेगा को 200 दिन के लिए चलाया जाए. एमएसएमई के लिए तत्काल एक पैकेज दिया जाए. मजदूरों को वापस भेजने के लिए तत्काल सुविधा उपलब्ध कराई जाए.’

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वीर सावरकर एक महान देशभक्त जो कुछ देशद्रोही और घटिया राजनीति करने वालो का शिकार बन गये

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वीर सावरकर वो नाम जिसके हृदय में देशभक्ति की ज्वाला धधकती थी. सावरकर वो महान मनुष्य जिसने भारतीय संस्कृति के उपासना को ही जीवन समझा, सावरकर वो तेज़ जिसकी लपट ने अंग्रेजो के इरादों को झुलसा दिया, जिसने अपने प्राण की चिंता की नहीं, सावरकर कहते थे, मातृभूमि! तेरे चरणों में पहले ही मैं अपना मन अर्पित कर चुका हूँ. देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है, यह मानकर मैंने तेरी सेवा के माध्यम से भगवान की सेवा की करता हूं.

सावरकर के वीरता के किस्सों को एक लेख में समेटना बेहद कठिन है. वीर सावरकर भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के केन्द्र लन्दन में उसके विरुद्ध क्रांतिकारी आन्दोलन संगठित किया, वे भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सन् 1857 की लड़ाई को ‘भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम’ बताते हुए 1907 में लगभग एक हज़ार पृष्ठों का इतिहास लिखा, अंगेजो के दुश्मन थे सावरकर उन्होंने अपने मित्रो को बम बनाना और गुरिल्ला पद्धति से युद्ध करने की कला सिखाई, 1909 में सावरकर के मित्र और अनुयायी मदनलाल ढींगरा ने एक सार्वजनिक बैठक में अंग्रेज अफसर कर्जन की हत्या कर दी. ढींगरा के इस काम से भारत और ब्रिटेन में क्रांतिकारी गतिविधिया बढ़ गयी, सावरकर ने ढींगरा को राजनीतिक और कानूनी सहयोग दिया, लेकिन बाद में अंग्रेज सरकार ने एक गुप्त और प्रतिबंधित परीक्षण कर ढींगरा को मौत की सजा सुना दी.

सावरकर ने ढींगरा के लिये आवाज़ उठायी उसे देशभक्त बताकर क्रांतिकारी विद्रोह को औऱर उग्र कर दिया, सावरकर की गतिविधियों को देखते हुए अंग्रेज सरकार ने हत्या की योजना में शामिल होने और पिस्तौले भारत भेजने के जुर्म में उन्हें फंसा दिया, जिसके बाद सावरकर को गिरफ्तार कर लिया गया, सावरकर को आगे के अभियोग के लिए भारत ले जाने का विचार किया गया. जब सावरकर को भारत जाने की खबर पता चली तो सावरकर ने अपने मित्र को जहाज से फ्रांस के रुकते वक्त भाग जाने की योजना पत्र में लिखी, जहाज रुका और सावरकर खिड़की से निकलकर समुद्र के पानी में तैरते हुए भाग गए, लेकिन मित्र को आने में देर होने की वजह से उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.

सावरकर के अनेकों ऐसे काम है जो सवारकर को वीर बनाते है लेक़िन आज भारत का दुर्भाग्य है कि सावरकर देश की घटिया राजनीति का शिकार हो गये, कुछ नीच मानसिकता के लोग इतने महान वीर पुरुष के जीवन पर प्रश्नचिन्ह लगाते है औऱ उनके वीर व्यक्तित्व को कलंकित करते है. राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले कई लोग इस देश में अपनी घटिया मानसिकता का परिचय देते हुए सावरकर को कायर कहते है और वज़ह बताते है उनके द्वारा जेल से लिखी गयी दया याचिका को, सावरकर के उपर राजनीति करने वाले और वीरता पर सवाल करने वालों को पता होना चाहिये कि उनकी ओछी मानसिकता सावरकर के बुद्धिमता के तेज़ को नही समझ सकती.

जिस दया याचिका के बाद सावरकर के रिहाई को लेकर लोग उन्हें कायर कहते है कि उन्होंने अंग्रेजो को माफीनामा क्यों लिखा उन्हें पता होना चैहिये की अंडमान के जेल में सड़ने से बेहतर था कि बाहर निकल कर अंग्रेजी हुकूमत से लड़ना सावरकर जानते थे, सालों जेल में रहने से बेहतर है भूमिगत रह करके उन्हें अंग्रेजों के विरुद्ध काम करने का जितना मौका मिले, उतना अच्छा है. उनकी सोच ये थी कि अगर वो जेल के बाहर रहेंगे तो वो जो करना चाहेंगे, वो कर सकेंगे जोकि अंडमान निकोबार की जेल से संभव नहीं था. जो बिल्कुल वाजिब सोच थी इसलिए उन्होंने ने दया याचिका लिख कर अंग्रेजो से रिहाई मांगी ताकि वो आज़ादी के मकसद में कामयाब हो सके.

लेकिन आज कुछ देशद्रोहियों ने उनके इसी दया याचिका के चलते वीर सावरकर के वीरता पर सवाल करने का मौका मिल गया ऐसे नीच विचारधारा के लोग एक देशभक्त का अपमान कर रहे है और सावरकर के कृति को धूमिल कर रहे है लेकिन वीर सावरकर आज भी हर देशभक्त के हृदय में जीवित है और सदैव रहेंगे.. तो आप भी वीर सावरकर जिंदाबाद..

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