26.5 किलो नहीं, बल्कि 18.6 किलो सोना ही बरामद कर पाई पुलिस

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Pic by Madhav Kumar

मुथूट फाइनेंस कंपनी से लूटे गए सोने में पुलिस ने लगातार छापेमारी कर अपराधियों के पास से 745 पैकेट सोना बरामद किया था। इसे लेकर पुलिस अधिकारियों ने रविवार को 26.5 किलोग्राम सोना बरामद कर लिए जाने की बात कही। लेकिन, सोमवार को इन 745 पैकेट में बंद जेवरात का वजन 18.604 किलोग्राम ही बताया गया। ऐसे में अब भी कुल लूटे गए 11 करोड़ रुपए के 32 किलो 968 ग्राम सोना में 4.67 करोड़ रुपए का 14 किलो 364 ग्राम सोना लुटेरों के पास ही है। पुलिस ने अपनी इस बड़ी चूक की सफाई में कहा है कि बरामद सोने का पॉलीबैग व टैग के साथ वजन किए जाने से कुल वजन 26.5 किलोग्राम हो गया था। पुलिस ने जब्ती सूची में प्रत्येक पैकेट पर अंकित ग्राहक का नाम, कस्टमर आईडी, गहने के वजन का विस्तार से जिक्र किया है। जब्ती सूची के साथ धराए तीनों अपराधियों को पुलिस ने सोमवार शाम कोर्ट में प्रस्तुत किया। उसके बाद तीनों को जेल भेजा गया। उधर, पुलिस का पूरा दिन बरामद गहने के मिलान व अपराधियों को जेल भेजने के लिए कागजात बनाने में ही गुजरा। छापेमारी के लिए टीम नहीं निकल पाई। टीम में शामिल अधिकारी भी आराम की मुद्रा में दिखे। जेवर के नेट वजन को लेकर दिनभर मंथन चला। एसएसपी मनोज कुमार ने बताया कि बरामद सोना के पैकेट सील हैं। उन्हें फाड़कर गहने निकाले नहीं जा सकते थे। टैग फाड़ देने से कोर्ट में अभियोजन साक्ष्य कमजोर पड़ जाता। इसलिए, पॉलीबैग व टैग के साथ वजन किया गया था। उसका वजन 26.5 किलोग्राम था। पैकेट का मिलान करने पर उस पर अंकित वजन के आधार पर जब्ती सूची में 18.604 किलोग्राम जेवरात बरामद होने का जिक्र किया गया है। ऐसे मुथूट कंपनी पत्थर व नग का वजन काटकर केवल सोना के वजन का जिक्र ही पैकेट पर करती है।

Pic by Madhav Kumar

फटे पैकेट से निकले गहने के मालिक की पहचान के लिए वीडियो फुटेज से होगा मिलान : अपराधियों से बरामद गहनों में 96 पैकेट फटे हुए हैं। इन पर टैग भी नहीं है। बिना टैग वाले गहने के मालिक को पहचान देने के लिए जद्दोजहद करनी होगी। कंपनी के सेक्युरिटी एजीएम रोहित कपूर ने बताया कि गहना गिरवी रखे जाने के समय पूरी वीडियोग्राफी कराई जाती है। इससे मालिक के गहनों का मिलान होगा। साथ ही अगर मालिक के पास गहने की तस्वीर है तो उससे भी मिलान होगा। गहना प्राप्त करने की प्रक्रिया थोड़ी जटिल है, लेकिन बरामद गहने कोर्ट से लेने के बाद सभी ग्राहकों की सूची जारी कर दी जाएगी।

मुथूट फाइनेंस से लूटे गए सोने की बरामदगी के साथ गिरफ्तार तीनों अपराधियों को कोर्ट में प्रस्तुत कर भेजा गया जेल

मेडिकल जांच के लिए गिरफ्तार अपराधियों को सदर अस्पताल लेकर पहुंची पुलिस।

मुथूट फाइनेंस में डाका के बाद पटना से होते हुए दिल्ली भाग निकला विकास और रंजीत

मुजफ्फरपुर | मुथूट फाइनेंस में 11 करोड़ का सोना लूटने वाले गैंग का सरगना विकास झा व रंजीत ठाकुर के पटना से दिल्ली भाग जाने का पुलिस को सुराग मिला है। मुथूट फाइनेंस से लूटे गए 6 बैग सोना में दो बैग विकास व रंजीत लेकर बाइक से निकला था। जबकि, वीरेंद्र के पास एक बैग सोना होने की आशंका है। वीरेंद्र व एक अन्य की तलाश में पुलिस लालगंज इलाके में छापेमारी कर रही है। वैशाली का वीरेंद्र व एक अन्य अपराधी एक बैग सोना लेकर सबसे आगे बाइक से निकले। सरगना विकास झा व रंजीत ठाकुर दो बैग सोना लेकर दूसरी बाइक से बीच में निकले। जबकि, तीसरी बाइक से अरमान, वीरू व आलोक भागा। अरमान, वीरू व आलोक द्वारा लूटा गया सोना ही वैशाली में बरामद हो सका है। विकास व वीरेंद्र की गिरफ्तारी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसी दोनों के पास अभी लूटा गया करीब 40 फीसदी सोने होने की संभावना है। विकास व रंजीत मुजफ्फरपुर से महुआ होते हुए पटना निकल गया। पटना से उसके दिल्ली भागने का सुराग पुलिस को मिल रहा है। पुलिस की नजर वैशाली व समस्तीपुर के कई आभूषण दुकानदारों पर अभी है।

कंपनी के एजीएम रोहित कपूर ने कहा- कंपनी को पुलिस ने 26.5 किलो सोना बरामद किए जाने की जानकारी दी है

मुथूट फाइनेंस कंपनी के सेक्युरिटी एजीएम रोहित कपूर ने बताया कि पुलिस की ओर से कंपनी को 26.5 किलोग्राम सोना बरामद कर लिए जाने की जानकारी दी गई थी। पुलिस को धन्यवाद देने के साथ-साथ कंपनी ने संबंधित अधिकारियों को इनाम देने की घोषणा भी की। साथ ही शेष बचे गहने की भी शीघ्र बरामदगी के लिए आग्रह किया गया है। अब गहने की जब्ती सूची को न्यायालय से मुथूट फाइनेंस कंपनी के वकील लेंगे। उसके बाद ही बता पाऊंगा कि कितने ग्राहकों के गहने वापस मिल चुके हैं।

स्वीकारोक्ति बयान : विकास झा के बरामद मोबाइल में मिली आलोक व अभिषेक की तस्वीर, पहले ही वीरेंद्र शर्मा कर चुका था लूट के लिए रेकी

विकास के मोबाइल में सेव तस्वीरों को पुलिस ने खंगाला तो उसमें आलोक की तस्वीर मिली। आलोक की तस्वीर का मिलान सीसीटीवी फुटेज से किया गया। इसमें आलोक गुलाबी रंग का कपड़ा सिर में बांधे दिखा। आलोक की पहचान विकास के भाई से कराई गई तो उसने उसका पता भी बता दिया। तब आलोक को पुलिस ने उसके गांव से दबोच लिया। आलोक ने पूछताछ में स्पष्ट किया कि लूट के बाद सोना को अभिषेक के यहां छिपाया गया है। लूट को अंजाम देने वाले गैंग का लीडर वीरेंद्र शर्मा का अभिषेक करीबी है। उसे गैंग ने लूटे गए गहने को छिपाकर रखने और किसी आभूषण कारोबारी को बेच देने के लिए कहा था। आलोक ने बयान में कहा है कि उसे विकास साथ में गहना लूटने के लिए ले गया था। महुआ में एक दुकान पर गैंग के अन्य अपराधियों से मुलाकात हुई। इसमें कई अपराधियों को वह नहीं पहचानता है। सरगना वीरेंद्र शर्मा से हाजीपुर में अन्य अपराधी मिले उसके बाद सभी तीन बाइक से बाइक से लूट को अंजाम देने मुजफ्फरपुर पहुंचे। वीरेंद्र शर्मा और दो अन्य साथी पहले ही सारी रेकी और भागने के रास्ते को देख चुके थे। अन्य अपराधियों को भी इन रास्तों को दिखाया उसके बाद सभी बैंक में घुसे और गार्ड को कब्जे में लेने के बाद लूट को अंजाम दिया गया। लूट के इस मामले में अब वीरेंद्र और विकास की गिरफ्तारी के बाद ही आगे लूटे गए गहने का कोई सुराग पुलिस को लग पाएगा।

सुभाष ने कहा- विकास ने दबाए थे मिट्टी में गहने

विकास के भाई सुभाष ने पुलिस को बताया कि लूट के गहने में से विकास ने कुछ सोना गिरोह से भी छिपाए थे। उसे घर के सामने बगीचे में मिट्टी के नीचे दबा दिया गया। विकास से नजरें बचा सुभाष ने भी 12 पैकेट निकाल लिए। जिसे उसने केला के पेड़ के पास दबाया। देर रात पुलिस ने छापेमारी की तो वह पकड़ा गया और उसका भाई विकास मोबाइल छोड़कर भाग निकला। उसके मोबाइल में उस कपड़े में विकास की तस्वीर मिली है जिसे पहनकर वह लूट को अंजाम देने के दौरान सीसीटीवी फुटेज में दिखा था।

बैंकों को मिलेगी शस्त्र लाइसेंस की स्वीकृति

सोना लूट की घटना के बाद 8 को गृह विभाग ने सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को आवश्यकता के अनुसार शीघ्र शस्त्र लाइसेंस की स्वीकृति देने के लिए कहा है। मुजफ्फरपुर समेत सभी डीएम को इसे लेकर गाइडलाइन भेजी गई है। बैंकों को भी इससे अवगत कराने के लिए कहा गया है। भेजी गई गाइडलाइन में विभाग के अवर सचिव ने आयुध अधिनियम- 2016 के नियम 10 के तहत बैंकों को लाइसेंस देने का प्रावधान होने की बात कही है।

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ग्राहकों में है यह उत्सुकता कि कब मिलेंगे उनके गहने

अपराधियों से गहना मिलने की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद सोमवार को भी दर्जनों ग्राहक मुथूट फाइनेंस में पहुंचते रहे। उनकी उत्सुकता है कि गहना बरामद हो चुके हैं अब उन्हें ये कब लौटाए जाएंगे। खासकर ऐसे ग्राहक जिनके लोन की अवधि पूरी हो रही है उनमें ज्यादा बेचैनी है। वे लोग भी परेशान हैं जिन्होंने सेटलमेंट के लिए आवेदन दे दिया है। एजीएम ने बताया कि सेटलमेंट की प्रक्रिया फिलहाल रुक जाएगी। गहना कोर्ट से लेने के बाद सूची जारी की जाएगी और जिन लोगों के गहने नहीं मिले होंगे उनका ही सेटलमेंट किया जाएगा।

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क्राइम कंट्रोल पर खर्च होंगे इनाम के 30 लाख

मुथूट फाइनेंस की ओर से घोषित इनाम के 30 लाख रुपए मिलने पर छापेमारी में शामिल पुलिस अधिकारियों के बीच नहीं बंटेंगे, बल्कि शहर के क्राइम कंट्रोल पर खर्च किए जाएंगे। एसएसपी ने बताया कि मुख्यालय का निर्देश है कि इस राशि से सीसी कैमरे, पुलिस चेक पोस्ट आदि समाज कल्याण व पुलिसिंग में मदद आने वाले कार्य कराए जाएं। इधर, कंपनी के सेक्युरिटी एजीएम रोहित कपूर ने कहा कि कंपनी राशि देने की घोषणा कर चुकी है।

एसएसपी ने दी सफाई- सील पैकेट को फाड़ देने से कोर्ट में अभियोजन साक्ष्य कमजोर पड़ जाता, इसलिए पॉलीबैग व टैग के साथ किया गया था वजन

अपील पर लोग लौटाने लगे रोड पर मिले लूट के गहने

मुथूट में लूट के बाद भाग रहे अपराधियों के बैग से गिरे गहने सड़क से उठानेवाले लोग पुलिस की अपील पर एसएसपी ऑफिस पहुंच लौटाने लगे हैं। सोमवार को एक युवक ने दो पैकेट गहने लौटाए। एसएसपी ने कहा कि उसका नाम सार्वजनिक नहीं होगा। कई अन्य लोग भी सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे हैं। उनसे भी आग्रह है कि वे गहने लौटा दें, अन्यथा कार्रवाई के लिए वे खुद जिम्मेवार होंगे। बता दें कि लूट के बाद भाग रहे अपराधी अल्कापुरी मोहल्ला मोड़ के पास बाइक से गिर गए थे। उनका बैग फट गया जिससे कई पैकेट गहने सड़क पर गिर गए।

Input : Dainik Bhaskar