आजादी के बाद से लगातार सरकारों की चिंता में किसान सबसे ऊपर रहे। केंद्र हो या राज्य, हर दल की सरकार ने सबसे अधिक ध्यान किसानों पर देने का दावा किया, लेकिन इस दावे में ईमानदारी की कमी कई बार दिखी है। गया जिले का यह मामला ऐसा ही है। गया के नीमचक बथानी प्रखंड के एक गांव में पूरे 40 साल पहले किसानों को सिंचाई की सुविधा के लिए सरकारी योजना से नलकूप लगाया गया। इससे गांव के किसानों को काफी फायदा हुआ, हालांकि यह सुख क्षणिक साबित हुआ। एक बार नलकूप खराब होने पर सरकारी कर्मचारी इसमें लगी मोटर बनाने के लिए ले गए तो 38 साल गुजरने के बाद अब तक नहीं लौटे हैं।
1980 में ही गांव में लग गया था नलकूप, लेकिन खुशी को लग गई नजर
यह मामला नीमचक बथानी प्रखंड मनियारा पंचायत अंतर्गत खेसारी टोला गांधीनगर का है। गांव के किसान अरूण यादव, मुख्तार यादव और अनिल यादव ने बताया कि नलकूप 1980 में लगाया गया था। 2 वर्ष तक किसानों को पानी मिला और 2 वर्ष के बाद मोटर खराब होने के कारण इसकी सुविधा मिलनी बंद हो गई। तब से अब तक 38 वर्ष बीत जाने के बाद भी नलकूप चालू नहीं हो सका। इसके कारण इस इलाके के किसान खेती नहीं कर पाते हैं।
इलाके के आधा दर्जन गांवों को मिलता था इस नलकूप का लाभ
इस क्षेत्र के आधा दर्जन गांव के किसान नलकूप से खेती करते थे। नलकूप खराब हो जाने के बाद मोटर बनाने के लिए ले जाया गया था, लेकिन आज तक नहीं तो मोटर बन कर आई और न हीं कोई पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि इस नलकूप को देखने के लिए आए। गरीब किसान होने के कारण लोग अपनी निजी बोरिंग नहीं करा पा रहे हैं। इस क्षेत्र की ज्यादातर जमीन परित रहती है। किसानों ने बताया कि नलकूप जब चलता था, उस समय किसान दोनों सीजन की फसल उपजाते थे। धान और गेहूं किसान लोग नलकूप से पटवन कर उपजा लेते थे।
किसानों के सामने रोजगार के लिए पलायन की मजबूरी
अब इलाके के किसानों के समा छोड़ कर रोजगार के लिए बाहर जाने की मजबूरी है। किसानों ने बताया कि इस नलकूप के लिए दो ऑपरेटर रखे गये थे। ऑपरेटर को रहने के लिए भवन भी बनाया गया था। आज वह भवन बेकार पड़ा हुआ है। 30 हॉर्स पावर की मोटर से किसानों को खेती के लिए पानी सप्लाई होती थी।
Input: Dainik Jagran





