केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार जुलाई में होने की बात कही जा रही है। LJP में हुए विवाद ने मंत्रिमंडल विस्तार में अड़चन पैदा कर दी है। चर्चा थी कि इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में LJP को भी शामिल किया जाएगा। क्योंकि LJP सुप्रीमो रामविलास पासवान का निधन केंद्रीय मंत्री रहते हो गया था। ऐसे में चिराग पासवान को केंद्र में मंत्री बना दिया जाएगा। लेकिन ऐन मौके पर ही चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस ने विरोध कर दिया।

पशुपति पारस ने पांच सांसदों को लेकर LJP पर दावा ठोक दिया है। हालांकि, पारस को लोकसभा में संसदीय दल के नेता के तौर पर मान्यता मिल चुकी है। लेकिन, LJP पर हक की लड़ाई ने मंत्रिमंडल विस्तार पर ग्रहण लगा दिया है।

5 जुलाई वाली ‘आशीर्वाद यात्रा’ पर नजर
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय इस बात से पूरी तरह इत्तेफाक रखते हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार LJP विवाद में फंसा है। BJP अभी चिराग पासवान की 5 जुलाई वाली ‘आशीर्वाद यात्रा’ पर नजर टिकाए हुए है। इस यात्रा को चिराग पासवान हाजीपुर से शुरू कर रहे हैं। BJP देखना चाहती है कि चिराग पासवान में उनके पिता रामविलास पासवान वाली बात है कि नहीं। चिराग पासवान की इस यात्रा के बाद ही BJP भी फैसला लेगी और संभवत: चुनाव आयोग भी इसी के आसपास अपना फैसला सुनाएगा।

LJP पर चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार
दरअसल, केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार जून के आखिर तक हो जाना था। लेकिन, LJP के विवाद ने इसको आगे बढ़ा दिया। LJP टूट के ऑपरेशन को JDU के कुछ नेताओं ने अंजाम दिया था। लेकिन, अंतिम मौके पर पारस गुट ने अपने लिए अलग दल की मांग कर दी, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार लिया। पशुपति पारस को LJP संसदीय दल का नेता बना दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के बाद पारस और चिराग ने चुनाव आयोग के पास दलील दी है कि पार्टी उनकी है। अब पूरी गेंद चुनाव आयोग के पास है कि वो किसके पक्ष में फैसला सुनाता है।
खबर यह है कि दो-चार दिनों में ही इस पर फैसला हो जाना है। यदि फैसला पशुपति पारस के पक्ष में गया तो चिराग पासवान कोर्ट चले जाएंगे। लेकिन, इस बीच यदि मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो NDA दोनों पक्ष को इस विस्तार अलग रखेगी। केंद्र सरकार में चिराग पासवान का दावा है। इसको नकारा नहीं जा सकता। ऐसे में BJP पूरी तरह से ‘वेट एंड वाच’ कर रही है कि बिहार की जनता चिराग पासवान को स्वीकारती है या नकारती है।
Input: dainik bhaskar






