सोशल मीडिया के माध्यम से आजकल कई ऐसी प्रतिभाएं हमारे सामने आ रही हैं जो गुमनाम रह जाती हैं. हालांकि, कई ऐसी खबरें वायरल होने के बाद संबंधित व्यक्ति काफी लोकप्रिय हुए और समाज में उन्हें उचित सम्मान मिला. इनमें हाल फिलहाल में सबसे अधिक चर्चित नाम ‘कच्चा बादाम’ गाना गाकर गलियों में मूंगफली बेचने वाले पश्चिम बंगाल के भुवन बाड्याकर का है. इसी तरह स्टेशन पर बैठकर गुनगुनाने वाली रानू मंडल को बॉलीवुड में गाने का चांस मिला और वह फर्श से अर्श तक पहुंच गईं. ऐसे ही नरेन्द्र मोदी व अरविंद केजरीवाल जैसे विभिन्न नेताओं की मिमिक्री कर खिलौने बेचने वाला बनारस के रहने वाले अविनाश दूबे भी काफी मशहूर हो चुके हैं. अब बिहार से एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति निराले अंदाज में अखबार बेच रहे हैं और यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है.

ट्रेन में समाचार पत्र बेचते हुए इस शख्स की बौद्धिक क्षमता के बारे में चर्चा करते हुए लोग वीडियो को खूब वायरल कर रहे हैं. इस वीडियो को देखने वाला हर कोई वाह-वाह करने को मजबूर हो जाता है. आप भी अगर यह वीडियो देखेंगे तो इस व्यक्ति की प्रतिभा को देख दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे.
जीत प्रसाद कहते हैं- जो पढ़ेगा अखबार वो बनेगा समझदार, यह है तुम्हारे जिंदगी का सबसे बड़ा हथियार. होशियार, समझ लो इसे पुरस्कार और मत समझो केवल एक अखबार. अखबार की विशेषता का सजीव चित्रण करते हुए जीत प्रसाद यूं हीं लोकल से लेकर एक्सप्रेस ट्रेनों में अखबार बेचा करते हैं और इन दिनों सुर्खियों में हैं.

बिहार के दानापुर अनुमंडल स्थित खगौल निवासी जीत प्रसाद कर्मयोगी अपने खास स्टाइल और खास बॉडी लैंग्वेज के दम पर ट्रेनों में अखबार बेचते हैं. यात्री भी इनकी कविता सुनते ही झट से अखबार खरीद लेते हैं. अखबार बेचने को लेकर जीत प्रसाद का तौर-तरीका बताता है कि उनमें कमाल की प्रतिभा है.

जीत प्रसाद ने जिन शब्दों से अपनी पैरोडी को पिरोया है वह हम आपके सामने हूबहू लाए हैं.
जो पढ़ेगा अखबार वह बनेगा समझदार, होशियार, तेजतर्रार;
मत समझो केवल तुम इसको अखबार, यह है तलवार की धार!
क्योंकि, इससे ही चलती है देश और दुनिया की सरकार;
पैसा नहीं जाएगा तुम्हारा बेकार, ट्रेन में कर रहे हो तुम इंतजार!
तुम्हारी हसरत, चाहत तमन्नाओं के इजहार के शब्दों का अलंकार;
ह्रस्व उ कार, दीर्घ उ कार, क ख ग घ ङ च छ ज ञ को बोलने की कला सिखाती है यह अखबार!
मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, बिग स्क्रीन, टच स्क्रीन और हाई स्पीड इंटरनेट नहीं देगा यह ज्ञान;
पुस्तक, चिट्ठी, लिफाफा, पोस्टकार्ड, लिफाफा, अंतर्देशीय पत्र और बैरन बढ़ाता मानवता का मान!
मचा हुआ घमासान, इसमें छपा है दुनिया के कई नेताओं और कई देशों का बयान;
विचार है; मजेदार है, जो समझदार है वही लेता अखबार है!
हालांकि, अखबार बिकते हुए नहीं देख जीत प्रसाद कहते हैं.
किसी का घर-द्वार परिवार है, लग रहा है यहां बोलना बेकार है;
मगर यह समझ लो अभी करना तुमको ट्रेन में इंतजार है!
जहां नहीं रहता है अखबार वहां बिल्कुल लगता है बेकार, जैसे कोरोना से बीमार!
जिन्होंने पड़ा अखबार उन्होंने किया अपने में कई सुधार;
आगे दिखाया चमत्कार और खोल दिए सफलता के कई द्वार!
दुनिया करती है उसको नमस्कार; मत करो अखबार का तिरस्कार,
यह है तुम्हारी जिंदगी का सबसे बड़ा हथियार;
समझ लो सबसे बड़ा पुरस्कार!
Source : News18






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