पूर्वी चंपारण जिले के पुराने और बूढ़े हो चुके वृक्ष अब अनाथ नहीं रहेंगे। इस जिले में गार्जियन ऑफ चंपारण अभियान शुरू किया गया है। डीएम शीर्षस्थ कपिल अशोक ने सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बरगद, नीम, पीपल, पकड़, आम, जामुन, बेल आंवला, अर्जुन, अशोक, कदम, नारियल, ताड़, कटहल, महोगनी, महुआ, शाल, चंदन, सेमल, शीशम, इमली सागवान आदि वृक्षों की पहले पहचान कराई फिर इनके संरक्षण की योजना बनायी गई। इसी के तहत सामुदायिक अपनापन के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत अभी तक 12128 बड़े वृक्षों की जियो टैगिंग करायी गयी है। इन वृक्षों की देखभाल के लिए 57680 लोगों ने रूचि दिखलाई है और अभिभावक बनने को तैयार हैं। इस अभियान में एक लाख पेड़ों के संरक्षण का लक्ष्य है। जिला प्रशासन की अनूठी पहल की हर कोई प्रशंसा कर रहा है। यह राज्य सरकार का मॉडल प्रोजेक्ट होगा, इसकी सफलता अन्य स्थानों पर भी इसके प्रयोग का रास्ता खोलेगा।

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दरअसल, पर्यावरण संतुलन, मिट्टी संरक्षण और बाढ़ व सूखे से बचाव में बड़े वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज के विभिन्न वर्गों से इनका सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक संबंध रहता है। पक्षियों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी ये आश्रय स्थल हैं। इसीलिए बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए लोग इनकी शरण में जाते हैं। जानकारी के अनुसार गार्जियन ऑफ चंपारण एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। अब तक 25000 से अधिक डाउनलोड हो चुका है। इसके माध्यम से कोई व्यक्ति जियो टैग्ड वृक्षों के अभिभावक बन सकता है।

अब तक क्या

1700 वृक्षों की जड़ों में मिट्टी भराई, 170 वृक्षों के लिए नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था की गयी है। 650 वृक्षों का कचहरी चबूतरा निर्माण कराने के साथ-साथ पेस्ट कंट्रोल, गटोर स्प्रे, लाइम ट्रीटमेंट कराया गया है। अत्यंत प्राचीन वृक्षों के महत्व को यूनिक साइन बोर्ड से दर्शाया गया है। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा वृक्षों के नीचे विभागीय और सांस्कृतिक कार्यक्रम कराए जा रहे हैं। इस कड़ी में दही-हांडी, दीप उत्सव आदि कार्यक्रम हुए हैं। विशेष रूप से शिक्षा विभाग ने वृक्षों के नीचे वृक्ष पाठशाला का आयोजन किया है। कई आंगनबाड़ी सेविकाओं ने इन वृक्षों के नीचे गोद भरायी करायी है।

बुजुर्ग पेड़ों को पेंशन भी : बुजुर्ग पेड़ों की देखभाल के लिए पेंशन की भी व्यवस्था की गयी है। उन्हें पेंशन के रूप में 4800 रुपये सालाना मिलेंगे। यह राशि इस क्षेत्र की जीविका दीदी को दी जाएगी। इस पैसे से उनकी जरूरतें पूरी की जाएंगी। दीदी रक्षा बंधन में उन्हें राखी बांधेंगी। वृक्ष के नीचे पढ़ने वाले बच्चों को किताब, कॉपी और कलम भी मिलेगी।

हरसिद्धि प्रखंड के कोलेश्वरी स्थान पर स्थित प्राचीन बरगद का वृक्ष 400 साल पुराना है। फिलहाल इसका अध्ययन पिपरा कृषि विज्ञान केंद्र कर रहा है। एक आंकड़े के अनुसार जिले में सात हजार पेड़ 50 वर्ष से अधिक पुराने हैं।

हाल के वर्षों में कई बड़े पेड़ों के गिरने और सूखने की घटनाएं हुई हैं। लिहाजा, ऐसे प्राचीन वृक्षों को धरोहर मानते हुए इनके संरक्षण पर अधिक ध्यान देने की योजना है।

Source : Hindustan

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