बिहार के लिए बाढ़ हर साल की आपदा है। फिलहाल राज्य सरकार ने बाढ़ प्रबंधन एवं बचाव से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किया है। इस बार बाढ़ से पशुओं की मौत की स्थिति में मुआवजा के नियमों में थोड़ा परिवर्तन किया है। पहले दावे के आधार पर भी प्रारंभिक जांच के बाद मुआवजा मिल जाता था। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए लोगों को पशुओं की मौत पर प्रखंड पशु चिकित्सकों को सूचित करने का सुझाव दिया गया है। हालांकि, जो पशु बाढ़ में बह जाएंगे, उनके लिए अभी भी दावे का आधार बरकरार रहेगा। प्रत्येक किसान को ज्यादा से ज्यादा तीन पशुओं की मौत पर मुआवजा दिया जाता है।

दरअसल, सरकार ने बाढ़ -आपदा में पशुओं की मौत होने पर मुआवजा देने के नियमों की प्रक्रिया को सरल कर दिया है। पशुपालकों को आपदा में पशु की मौत पर मुआवजा लेने के लिए के उसका पोस्टमार्टम कराना होगा। वहीं, पशु के बाढ़ में बह जाने पर थाना में सनहा दर्ज कराना होगा। इसके बाद ही पशु क्षति सहायता अनुदान (मुआवजा) देने की प्रक्रिया शुरू होगी। बाढ़ की स्थिति में पशु की मौत पर मुआवजा देने का प्रविधान है।

पशुपालन निदेशक विजय प्रकाश मीणा का कहना है आपदा में पशु की मौत होने पर इसकी सूचना प्रखंड के पशु चिकित्सा अधिकारी और अंचलाधिकारी को देनी होगी। पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा। पशुपालक तय प्रारूप प्रपत्र ‘क’ पर आवेदन अंचलाधिकारी एवं जिला पशुपालन पदाधिकारी को समर्पित करेंगे।

पशु का शव नष्ट होता है या बाढ़ में बह जाता है तो पशुपालक को थाना में सनहा दर्ज कराना होगा। सनहा और प्रपत्र ‘क’ में आवेदन लेने के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सिफारिश करानी होगी। इसके बाद मुआवजा का आवेदन अंचलाधिकारी को देना होगा। निदेशक ने बताया कि आपदा की घड़ी में पशुपालकों को हर संभव सहायता दी जाएगी। इसके लिए जिलेवार कार्यशाला का आयोजन और अन्य प्रचार-प्रसार माध्यमों से पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा।
Source : Dainik Jagran








