PATNA : बिहार में साइबर अपराध की जांच को तेज़ करने के लिए पटना और राजगीर में साइबर फॉरेंसिक लैब (सीएफएल) की स्थापना होने जा रही है। अगले चार से छह महीनों में ये दोनों लैब पूरी तरह से काम करना शुरू कर देंगी। एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ ने पुलिस मुख्यालय, सरदार पटेल भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि इन प्रयोगशालाओं के निर्माण के लिए गुजरात के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) के साथ समझौता किया गया है।

एडीजी के अनुसार, एनएफएसयू टीम स्थापना में तकनीकी सहयोग, उपकरणों की विशिष्टता, कंसल्टेंसी और प्रशिक्षण प्रदान करेगी। दोनों यूनिट में कार्यरत छह कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। परियोजना के लिए गृह विभाग से स्वीकृति और 13 करोड़ 66 लाख 52 हजार रुपये की राशि मंजूर हो चुकी है।

नए आपराधिक कानूनों के तहत सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों में ऑडियो-वीडियो सबूत के लिए फॉरेंसिक सहायता अनिवार्य है, जिससे सीएफएल की अहमियत और बढ़ गई है।

बिहार में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़े हैं—2022 में 1,606 से बढ़कर 2023 में 4,801 और 2024 में अब तक 5,721 मामले दर्ज हो चुके हैं। साइबर हेल्पलाइन 1930 पर अब तक 94 हजार शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 80 हजार वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी हैं। इन नई लैबों के शुरू होने से साइबर अपराध की जांच में अभूतपूर्व तेजी आने की उम्मीद है।









