जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार के अधीन रमना स्थित प्रस्तावित चम्पारण सत्याग्रह संग्रहालय के स्थल का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर की स्थिति का विस्तृत अवलोकन कर संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि यह स्थल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है, अतः इसके संरक्षण एवं व्यवस्थित विकास के लिए कार्य प्राथमिकता के आधार पर संपादित किया जाना आवश्यक है।
जिलाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, मुजफ्फरपुर को संग्रहालय परिसर में स्थित भवन का जीर्णोद्धार कर इसे सुदृढ़ एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान करने का निर्देश दिया। साथ ही परिसर के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप विकास हेतु आवश्यक कार्ययोजना एवं प्राक्कलन शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा, ताकि कार्य प्रारंभ कराने की दिशा में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1917 ई. में चम्पारण को “सत्याग्रह की प्रथम प्रयोगशाला” बनाया था। चंपारण जाने के क्रम में 10 अप्रैल 1917 को गांधी जी रमना स्थित गया बाबू के इसी मकान में प्रवास किए थे। 15 अप्रैल को वे चम्पारण के लिए प्रस्थान कर किसानों की पीड़ा को स्वर देते हुए चम्पारण सत्याग्रह का शंखनाद किया।

रामचंद्र शाही संग्रहालय का भ्रमण
निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी सेन ने मिठनपुरा स्थित रामचंद्र शाही संग्रहालय का भ्रमण किया। उन्होंने यहाँ प्रदर्शित पुरावशेषों एवं कलाकृतियों का अवलोकन किया तथा उनकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता की जानकारी प्राप्त की।
उन्होंने संग्रहालय भवन की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कार्यपालक अभियंता, LAEO वन, मुजफ्फरपुर को निर्देशित किया कि भवन के जीर्णोद्धार हेतु विस्तृत प्राक्कलन शीघ्र तैयार कर विभाग को उपलब्ध कराया जाए।

विभागीय अधिकारियों को मिले निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सेन ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि—
• प्रस्तावित चम्पारण सत्याग्रह संग्रहालय परिसर का जीर्णोद्धार प्राथमिकता पर किया जाए।
• विकास योजनाओं में ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाए।
• रामचंद्र शाही संग्रहालय भवन का जीर्णोद्धार हेतु प्राक्कलन शीघ्र उपलब्ध कराया जाए।
• संग्रहालयों में संरक्षित पुरावशेषों की समुचित देखभाल एवं संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
• आगंतुकों के लिए प्रकाश व्यवस्था, पेयजल एवं शौचालय जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाए।

जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन द्वारा किया गया यह निरीक्षण जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रयास न केवल स्थानीय जनमानस को अपनी गौरवशाली परंपरा से जोड़ने में सहायक होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत भी सिद्ध होगा। यह निरीक्षण जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित एवं विकसित करने के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निरीक्षण के दौरान उपस्थित पदाधिकारी
• विक्रम वीरकर, नगर आयुक्त, मुजफ्फरपुर
• श्रेष्ठ अनुपम, उप विकास आयुक्त, मुजफ्फरपुर
• तुषार कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी (पूर्वी)
• डॉ. विमल तिवारी, अपर निदेशक, संग्रहालय निदेशालय, बिहार
• रविचंद, कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल, मुजफ्फरपुर
• सुष्मिता झा, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी
सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।








