रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को भारत पहुंचने वाले हैं, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है। दोनों देशों के बीच बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और सामरिक साझेदारी की पृष्ठभूमि में यह यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। इसी बीच रूस की सत्ताधारी पार्टी के सांसद और मूल रूप से पटना (बिहार) के रहने वाले अभय सिंह ने भारत के लिए एक विशेष आग्रह किया है।

अभय सिंह ने कहा—भारत को एस-500 सिस्टम हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए

इंडिया टुडे के साथ बातचीत में अभय सिंह ने कहा कि भारत को रूस से एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम लेने पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, यह रूस की नवीनतम और अत्याधुनिक तकनीक है, जिसे अब तक रूस ने किसी भी देश को निर्यात नहीं किया है।

उन्होंने कहा—

“एस-400 एक बेहतरीन प्रणाली है, लेकिन एस-500 उससे भी अधिक उन्नत है। अगर रूस इसे भारत के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय लेता है, तो भारत दुनिया का पहला देश होगा जिसके पास यह क्षमता होगी। चीन के पास भी यह प्रणाली नहीं है। मुझे लगता है कि भारत को एस-500 की दिशा में पहल करनी चाहिए।”

अभय सिंह ने यह भी याद दिलाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को मिले एस-400 सिस्टम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

2018 की डील और अमेरिका की चेतावनी

गौरतलब है कि अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइल सिस्टम की पाँच इकाइयों की खरीद के लिए लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर की डील की थी। यह समझौता ऐसे समय हुआ था जब अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस तरह की खरीदारी पर CAATSA कानून के तहत भारत पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

कौन हैं अभय सिंह?

अभय सिंह वर्ष 1991 में पटना से सोवियत संघ में मेडिसिन की पढ़ाई के लिए गए थे। पटना के लोयोला हाई स्कूल में शिक्षा के बाद उन्होंने कुर्स्क स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी से MBBS किया। ग्रेजुएशन के बाद कुछ समय वह पटना में डॉक्टर के रूप में भी कार्यरत रहे, लेकिन परिस्थितियाँ अनुकूल न रहने पर वे दोबारा रूस लौट गए।

इसके बाद उन्होंने फार्मास्यूटिकल और रियल एस्टेट सेक्टर में व्यवसाय शुरू किया। राजनीति से लगाव होने के कारण वह सक्रिय राजनीति में आए और अब रूस की संसद (डेप्युटेट) के सदस्य हैं। 2017 और 2022—दोनों चुनावों में उन्होंने जीत दर्ज की।

पुतिन की यात्रा—भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी रफ्तार

चार वर्षों के बाद पुतिन की यह पहली भारत यात्रा है। गुरुवार रात दिल्ली पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी उनके सम्मान में निजी रात्रि भोज का आयोजन करेंगे। शुक्रवार को हैदराबाद हाउस में 23वीं भारत–रूस शिखर वार्ता आयोजित की जाएगी। पुतिन राजघाट भी जाएंगे और लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद रात 9:30 बजे भारत छोड़ेंगे।

वार्ता का मुख्य फोकस—रक्षा, व्यापार और न्यूक्लियर तकनीक

सूत्रों के अनुसार, शिखर वार्ता में इन मुद्दों पर प्रमुख चर्चा होगी—
• रक्षा सहयोग को नई दिशा
• द्विपक्षीय व्यापार को बाहरी दबावों (विशेषकर पश्चिमी देशों) से सुरक्षित रखना
• मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर पर संभावित संयुक्त प्रोजेक्ट
• रूस से रक्षा उपकरणों की खरीद में भारत की रुचि

पश्चिमी देशों की इस वार्ता पर कड़ी नज़र रहेगी, क्योंकि भारत–रूस संबंधों में हाल के दिनों में नई मजबूती देखी जा रही है।

शिखर बैठक से पहले रक्षा मंत्रियों की बातचीत

मुख्य वार्ता से पहले गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके रूसी समकक्ष आंद्रे बेलौसोव विस्तृत बैठक करेंगे। इस दौरान एस-400 की प्रगति, सुखोई-30 अपग्रेड योजना और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा खरीद पर चर्चा तय मानी जा रही है।

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