बिहार में सर्राफा कारोबार से जुड़ा एक बड़ा निर्णय लिया गया है। अब हिजाब, नकाब, घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर आने वाले ग्राहकों को गहनों की खरीद या बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह फैसला ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) ने लिया है, जिसे राज्य भर के सभी सदस्य सर्राफा कारोबारियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।

एआईजेजीएफ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अशोक वर्मा ने बताया कि सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई जगहों पर चेहरा ढककर आए अपराधियों द्वारा सर्राफा दुकानों में चोरी और लूट की घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में मुंबई में भी बुर्का और हिजाब पहनकर आए बदमाशों ने एक ज्वेलरी शॉप को निशाना बनाया था। ऐसे मामलों को रोकने और ग्राहकों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने के लिए यह नियम लागू किया गया है।

फेडरेशन का कहना है कि खुले चेहरे से दुकान में आने पर सीसीटीवी फुटेज में पहचान आसान होती है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है। अशोक वर्मा के अनुसार, झांसी और जोधपुर में पहले ही जिला स्तर पर इस तरह के नियम लागू किए जा चुके हैं, जबकि राज्य स्तर पर ऐसा निर्णय लेने वाला बिहार देश का पहला प्रदेश बन गया है।

इस फैसले पर धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। जमात-ए-इस्लामी हिंद, बिहार के अध्यक्ष मौलाना रिजवान इस्लाही ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान है और मुस्लिम महिलाएं अपने धार्मिक मूल्यों पर कायम रहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हिजाब पहनने वाली महिलाओं को खरीदारी से रोका जाएगा, तो वे खरीदारी नहीं करेंगी, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं से किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है।









