हिजाब विवाद को लेकर सुर्खियों में रहीं आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन ने आखिरकार बिहार सरकार की सेवा में योगदान दे दिया है। कई दिनों से चल रही अटकलों के बीच, ज्वाइनिंग की समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद उन्होंने पटना में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट किया।

राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य महफूज-उर-रहमान ने बताया कि डॉ. नुसरत परवीन ने अंतिम तिथि के दिन सिविल सर्जन कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि आज सेवा में शामिल होने की आखिरी तारीख थी और नुसरत ने उसी दिन योगदान दे दिया। अब सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से उन्हें उनके कार्यस्थल पर पदस्थापित किया जाएगा।

प्राचार्य के अनुसार, पहले सेवा में योगदान की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 7 जनवरी कर दिया गया था। डॉ. नुसरत परवीन इसी राजकीय तिब्बी कॉलेज की पूर्व छात्रा भी रह चुकी हैं। इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नाराजगी के कारण उन्होंने शुरुआत में नौकरी ज्वाइन करने से इनकार कर दिया था, हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था।

इससे पूर्व, समय सीमा के भीतर योगदान न देने पर कॉलेज प्रशासन ने बताया था कि नुसरत का परिवार मीडिया की अत्यधिक चर्चा से बचना चाहता था और इसी कारण उन्होंने कुछ समय लेने का निर्णय किया था। ज्वाइनिंग की तारीख बढ़ने के बाद करीब 23 दिनों के अंतराल पर नुसरत ने आखिरकार अपनी सेवा शुरू कर दी।

सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार ने जानकारी दी कि डॉ. नुसरत परवीन की तैनाती पटना के सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में की गई है। उन्होंने योगदान के लिए आवेदन दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। यह नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है।

गौरतलब है कि डॉ. नुसरत परवीन 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह के दौरान हिजाब हटाए जाने से जुड़े एक वीडियो के वायरल होने के बाद चर्चा में आई थीं। वह पटना स्थित राजकीय तिब्बी कॉलेज से एमडी पीजी की पढ़ाई कर रही हैं।







