राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान को लेकर राजस्व प्रशासन में एक अहम बदलाव किया है। अब राज्य के सभी राजस्व पदाधिकारी सप्ताह में दो दिन, सोमवार और शुक्रवार को अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहकर आमजनों की शिकायतें सुनेंगे। यह नई व्यवस्था 19 जनवरी से लागू होगी।

उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि राजस्व प्रशासन का उद्देश्य केवल नियम-कानूनों का पालन कराना नहीं, बल्कि नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और सम्मानजनक समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि सोमवार और शुक्रवार को होने वाली अनिवार्य जन-सुनवाई, शिकायतों का डिजिटल रिकॉर्ड तथा कार्यालयों में नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता से व्यवस्था और अधिक जवाबदेह बनेगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लागू सात निश्चय-3 के अंतर्गत ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ के संकल्प को जमीन पर उतारना सरकार की प्राथमिकता है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राजस्व से जुड़ी सभी सेवाएं समयबद्ध ढंग से पूरी हों। इस दिशा में प्रमंडलीय आयुक्त अपने-अपने प्रमंडलों में और समाहर्ता अपने-अपने जिलों में राजस्व प्रशासन को मजबूत बनाने में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। उनका मुख्य दायित्व होगा कि राजस्व प्रक्रियाओं के कारण आम लोगों के दैनिक जीवन में आने वाली परेशानियों को कम किया जाए।

राजस्व विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल की ओर से जारी पत्र के अनुसार, भूमि सुधार जन कल्याण संवाद कार्यक्रम की शुरुआत पटना जिले से की गई थी। इसके बाद लखीसराय, मुजफ्फरपुर, सहरसा, पूर्णिया और भागलपुर में भी ऐसे संवाद आयोजित किए गए, जहां लोगों ने अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रखीं।

इन जनसंवादों से मिले अनुभवों के आधार पर राजस्व प्रशासन को और अधिक संवेदनशील तथा जवाबदेह बनाने की आवश्यकता महसूस की गई। निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी राजस्व कार्यालयों में आम नागरिकों के साथ सम्मानजनक और शालीन व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। राज्य सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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