मुजफ्फरपुर जिले में सिविल न्यायालय में अटेंडेंट के पद पर नियुक्ति के लिए प्रारंभिक परीक्षा 15 मार्च को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा पटना उच्च न्यायालय के पर्यवेक्षण में जिले के कुल 28 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में संपन्न होगी। परीक्षा को स्वच्छ, शांतिपूर्ण और कदाचारमुक्त वातावरण में आयोजित कराने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।

इस परीक्षा में कुल 17,028 अभ्यर्थी शामिल होंगे। पहली पाली की परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों का रिपोर्टिंग समय सुबह 8:30 बजे से 9:30 बजे तक निर्धारित किया गया है, जबकि दूसरी पाली के लिए रिपोर्टिंग समय दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे तक रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पहली पाली के लिए सुबह 9:30 बजे के बाद और दूसरी पाली के लिए दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

परीक्षा के सफल और निष्पक्ष संचालन को लेकर जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन और वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा द्वारा संयुक्त आदेश जारी कर पर्याप्त संख्या में स्टैटिक दंडाधिकारी, गश्ती दंडाधिकारी तथा पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। परीक्षा से पूर्व समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक ने सभी प्रतिनियुक्त दंडाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और केंद्राधीक्षकों के साथ संयुक्त ब्रीफिंग कर परीक्षा संचालन से जुड़े दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की सख्ती से फ्रिस्किंग की जाए और किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित वस्तु को अंदर जाने की अनुमति न दी जाए। प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी अभ्यर्थी या कर्मी के पास बैग, मोबाइल फोन, पर्स, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, घड़ी, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर, पेजर या अन्य संचार उपकरण नहीं होने चाहिए।

अभ्यर्थियों को केवल फोटोयुक्त पहचान पत्र, प्रवेश पत्र, पारदर्शी पानी की बोतल और बॉल प्वाइंट पेन साथ ले जाने की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अन्य सामग्री परीक्षा केंद्र के भीतर ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

परीक्षा की प्रभावी निगरानी के लिए सभी केंद्रों पर विशेष तकनीकी व्यवस्थाएं भी की गई हैं। प्रशासन की ओर से परीक्षा केंद्रों पर वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई है। साथ ही बायोमेट्रिक प्रणाली और जैमर भी लगाए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी या इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी को रोका जा सके।

परीक्षा केंद्रों के मुख्य गेट पर ही अभ्यर्थियों की सघन तलाशी की व्यवस्था की जाएगी। यह प्रक्रिया केंद्राधीक्षक की निगरानी में कराई जाएगी, जिसमें स्टैटिक दंडाधिकारी और पुलिस बल की सहायता ली जाएगी। महिला अभ्यर्थियों की तलाशी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। परीक्षा केंद्र के गेट पर तथा आवश्यकता पड़ने पर परीक्षा कक्ष के अंदर महिला अभ्यर्थियों की तलाशी महिला पुलिसकर्मी, महिला वीक्षक, महिला केंद्राधीक्षक और अन्य महिला कर्मियों द्वारा ली जाएगी, ताकि प्रक्रिया गरिमा और नियमों के अनुरूप संपन्न हो सके।

परीक्षा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनुमंडल स्तर पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी और संबंधित अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को परीक्षा के अवसर पर विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परीक्षा केंद्रों के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की जाएगी, जिससे अनावश्यक भीड़ और अवांछित गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके।

इसके अलावा सभी परीक्षा केंद्रों के आसपास नियमित गश्ती कर कदाचारमुक्त परीक्षा सुनिश्चित की जाएगी। प्रशासन की ओर से परीक्षा की समुचित निगरानी और समन्वय के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भी विशेष जिम्मेदारी दी गई है। अपर समाहर्ता (राजस्व) और नगर पुलिस अधीक्षक को पूरी परीक्षा अवधि के दौरान विधि-व्यवस्था के वरीय प्रभार में रखा गया है, जो परीक्षा के दौरान लगातार अनुश्रवण और समन्वय करेंगे।

वहीं पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) को निर्देश दिए गए हैं कि शहर में यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक स्थानों पर पर्याप्त यातायात पुलिस की तैनाती की जाए, ताकि अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

जिला प्रशासन ने सभी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और परीक्षा से संबंधित सभी नियमों और निर्देशों का पालन करें, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

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