बिहार में अपराध जांच को और अधिक वैज्ञानिक व प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के डीजीपी विनय कुमार ने घोषणा की है कि पटना और राजगीर में जल्द ही साइबर फॉरेंसिक लैब स्थापित की जाएंगी। इसके लिए नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) के साथ समझौता किया गया है।

मंगलवार को बिहार पुलिस मुख्यालय, सरदार पटेल भवन में आयोजित दो दिवसीय फॉरेंसिक बायोलॉजिकल साइंस सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर डीजीपी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों में घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम की उपस्थिति अनिवार्य की जाएगी, ताकि साक्ष्य संग्रह में कोई कमी न रह जाए।

यह सम्मेलन केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले फोरेंसिक विज्ञान सेवा निदेशालय के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के कई फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हुए।

डीजीपी ने बताया कि अगले दो वर्षों में राज्य के सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों में प्रस्तावित 9 फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) पूरी तरह से चालू हो जाएंगी। इनके भवन तैयार हैं और 102 सहायक निदेशक व वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायकों की नियुक्ति भी की जा चुकी है।
फिलहाल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर (बिहार पुलिस अकादमी) में चार एफएसएल काम कर रहे हैं। राज्य के 44 पुलिस जिलों में 50 मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं, जिनकी संख्या भविष्य में और बढ़ाई जाएगी। जिन 28 जिलों में अभी एफएसएल नहीं है, वहां चलंत प्रयोगशालाओं के लिए भवन निर्माण पूरा हो चुका है।

डीजीपी ने राज्य में लंबित डीएनए जांच मामलों को लेकर चिंता व्यक्त की और केंद्र सरकार से सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि पॉक्सो मामलों में डीएनए परीक्षण अनिवार्य होता है, लेकिन बिहार में फिलहाल केवल एक ही डीएनए जांच लैब है, जो जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। ऐसे में 3 से 4 नई डीएनए लैब स्थापित करने के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता देने का अनुरोध किया गया है, जिसे निर्भया फंड या अन्य स्रोतों से उपलब्ध कराया जा सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में फॉरेंसिक सुविधाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2012-13 में जहां महज 700-800 मामलों में एफएसएल सेवाएं ली जाती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 18 हजार तक पहुंच गई है। वैज्ञानिकों की संख्या में भी कई गुना वृद्धि हुई है।
इस अवसर पर डीएफएसएस के निदेशक-सह-मुख्य फॉरेंसिक वैज्ञानिक एसके जैन, उत्तर प्रदेश फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के निदेशक जीके गोस्वामी, सीआईडी के एडीजी पारसनाथ, पटना एफएसएल के निदेशक हिंजय कुमार और नोडल अधिकारी सीमा पटेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।










