GERMANY : मुजफ्फरपुर के लिए गर्व का क्षण है कि शहर के होनहार वैज्ञानिक डॉ. आदित्य शेखर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जर्मनी में 21 अप्रैल 2026 को आयोजित German BioRegions Innovation Award में उन्हें विजेता के रूप में सम्मानित किया गया। पिछले 19 वर्षों से दिया जा रहा यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन वैज्ञानिकों को मिलता है, जिनके बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े नवाचार न केवल पेटेंट योग्य हों, बल्कि समाज और चिकित्सा क्षेत्र में व्यावहारिक उपयोग और आर्थिक प्रभाव की मजबूत संभावना भी रखते हों।

डॉ. आदित्य शेखर, जो मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के निवासी हैं और वर्तमान में जर्मनी के ब्राउनश्वाइग स्थित Helmholtz Centre for Infection Research में कार्यरत हैं, को उनके प्रोजेक्ट “Staphylococcus aureus α-toxin के लिए first-in-class small-molecule inhibitor” के लिए यह सम्मान मिला। उनका यह शोध आधुनिक चिकित्सा की एक बड़ी चुनौती—एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के बीच गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण—का समाधान खोजने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जर्मनी के विभिन्न शहरों—ड्रेसडेन, ब्राउनश्वाइग, बर्लिन, लाइपजिग, वुर्जबर्ग और फ्रैंकफर्ट—से कुल छह फाइनलिस्ट ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। एक स्वतंत्र जूरी ने तीन विजेताओं का चयन किया, जिनमें डॉ. आदित्य शेखर का नाम भी शामिल रहा।

जूरी ने डॉ. शेखर के प्रोजेक्ट की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि उनका शोध वैज्ञानिक रूप से मजबूत, प्रयोगात्मक रूप से प्रमाणित (in vivo validated), और क्लिनिकल उपयोग की दिशा में स्पष्ट संभावनाओं से भरपूर है। साथ ही, इस प्रोजेक्ट की बौद्धिक संपदा (intellectual property) की स्थिति भी काफी मजबूत मानी गई।

मुजफ्फरपुर जैसे शहर से निकलकर वैश्विक मंच पर इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा है। डॉ. आदित्य शेखर की यह सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती, बल्कि समर्पण और मेहनत से दुनिया के किसी भी मंच पर चमका जा सकता है।

यह उपलब्धि युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

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