देशभक्ति का ऐसा जज्बा बिरले ही देखने को मिलता है। एक इंटीरियर डिजाइनर युवक ने देश की रक्षा के लिए प्रा’णों की आ’हुति देने वाले वीर सपूतों की याद दिलोदिमाग से न मिटे, इसके लिए अपने पूरे शरीर पर जवानों के नाम गो’दवा लिए हैं। अभिषेक गौतम ने अपने शरीर पर 609 श’हीद जवानों के नाम गो’दवाए हैं। महात्मा गांधी, डा.अब्दुल कलाम और भगत सिंह की तस्वीर भी उसके शरीर पर दिखती है। देखकर लगता है कि अभिषेक चलता फिरता श’हीद स्मारक है।

अभिषेक यूपी के हापुड़ के रहने वाले हैं। वे आजकल सिवान में काम के सिलसिले में आए हुए हैं। उन्होंने बताया कि 2018 में ठाना कि देश की रक्षा को शहीद हुए हर जवानों के परिवार से किसी भी तरह मिलना है। 275 परिवारों से उनके घर जाकर मिल चुका हूं। उनके घर अपनी बाइक से पहुंचता हूं। सबसे पहले कारगिल युद्ध में शहीद महावीर चक्र से सम्मानित कैप्टन अनुज नय्यर के घर पर उनकी माता मीना नय्यर से मिला।

ताकि शहीद अमर रहे : अभिषेक जिन शहीद जवानों के परिवार से मिलने उनके गांव पहुंचते हैं, गांव वालों को शहीद की प्रतिमा, सड़क या खेल मैदान को उनके नाम पर स्थापित करने के लिए जागरूक करते हैं। अभिषेक ने बताया कि राजस्थान, पंजाब आदि में शहीदों के गांवों में उनकी प्रतिमा के लोकार्पण के समय वहां के लोगों ने आमंत्रित किया।
देश के लिए शहीद हुए जवानों के परिवारों से मिलता है अभिषेक मांगता है मिट्टी, दिल्ली में बड़ा स्मारक बनवाने की ठानी
अभिषेक ने बताया कि शहीदों के नाम पर शरीर में गोदना बनवाने के पीछे मकसद यह है कि अगर उनके नाम मेरे शरीर पर हैं तो हर पल बेहतर कार्य की प्रेरणा मिलती रहेगी, और समाज को इससे अच्छा संदेश मिलेगा। टैटू बनवाने का साइड इफेक्ट भी हुआ, पहले तो असहनीय पीड़ा हुई, बाद में छोटे-छोटे अनगिनत स्टोन (पथरी) निकल आए। घर में तीन महीने तक किसी को कुछ नहीं बताया। बाद में पत्नी और माता-पिता को सबकुछ बता दिया।

शहीद के स्वजनों से लेते मिट्टी
अभिषेक ने बताया कि वह सिवान समेत बिहार के कई जिलों के शहीद परिवारों से मिल कर वहां की मिट्टी को एकत्रित कर अपने साथ ले जाएंगे। अब तक पौने तीन सौ शहीदों के परिवार से ली गई मिट्टी को एकत्रित कर सुरक्षित रखा है, इससे दिल्ली में बड़ा शहीद स्मारक बनाने की योजना है, दिल्ली सरकार से संपर्क कर रहा हूं। इससे देश के लोगों को अपने देश के शहीदों के बारे में एक जगह ही जानकारी मिल सकेगी।

अगस्त तक कई परिवारों से मिलने की योजना: अभिषेक ने बताया कि अभी बिहार के शहीदों के घर-गांव जाएंगे। अगस्त तक कई शहीद परिवारों के पास जाकर उनसे मिलने की सूची बनाई है। वे परिवार से मिलकर एक स्मारक पत्र स्वजनों को भेंट करते हैं। उसका खर्च खुद उठाता हैं। शहीद जवानों के स्वजनों से मिलने पर जो प्यार उनसे मिलता है वह अगले परिवार तक पहुंचने की प्रेरणा देता है, जब तक जीवित हूं, इस कार्य को करता रहूंगा। केरल, जम्मू, पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान सहित कई राज्यों में पहुंचकर शहीदों के स्वजनों ने मिल चुका हूं।










