बांका जिला के पकरिया गांव निवासी और बंगलुरु में पदस्थापित आईजी सीमांत कुमार सिंह लॉकडाउन के दौरान फंसे विभिन्न प्रांतों के लोगों एवं बिहार वासियों के लिए मसीहा बनकर उभरे हैं।
दरअसल उन्होंने बिहार के गोपालगंज, छपरा, मुंगेर, भागलपुर, बांका सहित अन्य जिलों के करीब पंद्रह सौ से अधिक लोगों को 21 दिनों तक खाने-पीने एवं रहने की मुकम्मल व्यवस्था कराई है। लॉकडाउन के पूर्व बिहार आने वाले लोगों के लिए उनके गंतव्य स्थान तक भेजने में मदद भी की। संकट की घड़ी में उनके द्वारा किए गए कार्यों की बिहार में चर्चा हो रही है।

सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि बिहार के अधिकांश लोगों के लिए यहां भाषा की सबसे बड़ी समस्या है। यहां से पलायन कर रहे खासकर मजदूर वर्गों के लिए कन्नड़ भाषा बोलना टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। वहीं मकान मालिक भी इस संकट की घड़ी में मकान छोड़ने का फरमान जारी कर दिया था। समझा बुझाकर मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की बात समझाई गई। पूरा संसार कोरोना वायरस के कहर से जूझ रहा है।
इन विषम परिस्थितियों में मानवीय मूल्यों की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म व कर्म है। उन्होंने बताया कि मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की प्ररेणा उनके माता-पिता से मिली है। बिहार का कोई भी व्यक्ति बंगलुरु में फंसे अपने परिजनों को उनको नंबर 9448545103 पर कॉल करने के लिए कहकर उनकी मदद प्राप्त कर सकता है। उनके पिता कर्नल के पद पर कार्यरत रहकर देश की सेवा कर चुके हैं।







