पटना: बिहार में जाप नेता पप्पू यादव ने कहा कि लालू यादव कोई देश छोड़कर नहीं भाग जाएंगे और कोई बहुत ज्यादा बड़ा क्रिमिनल ऑफेंस नहीं है उनके ऊपर. कई बड़े नेताओं को पैरोल मिला है. ऐसे में लालू यादव को भी पैरोल मिलेगा तो कोई बड़ी बात नहीं है. इस वक्त लॉकडाउन में लालू यादव अपने परिवार के बीच रहेंगे तो वह ज्यादा स्वस्थ हो जाएंगे.

इसके बाद पप्पू यादव ने यह भी कहा कि आरजेडी अंबेडकर जयंती किस तर्ज पर मना रही है, यह समझ में नहीं आता है. ना तो आइडियोलॉजी वह फॉलो करते हैं ना कुछ. ऐसे में आरजेडी के युवराज दुबई या हरियाणा कहां घूम रहे हैं, यह पता नहीं है.
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है. ऐसे में आरजेडी अपनी मानवता को दरकिनार कर अंबेडकर जयंती मना रही है.आरजेडी जो संविधान को नहीं मानती वह कैसे अंबेडकर की बात करते हैं.
इसके अलावा जाप नेता ने कहा कि किसी भी धर्म मजहब के लोग अगर लॉकडाउन को फॉलो नहीं करते हैं और इस वक्त में देश का साथ नहीं देते हैं तो हर हालत में उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए.
पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मौनी बाबा कहा है. उन्होंने कहा कि सुशील मोदी, नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री अंधा बहरा और काना हैं. इसी वजह से बाहर बिहारी गाली, बोली और मार खाते हैं.
उन्होंने कहा कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने बोला कि मुश्किल हो रहा है हमें यहां पर लोगों को खिलाने में तो ऐसे में बस करके बिहारी बच्चों को भेज सकते हैं, जबकि लवली यूनिवर्सिटी के बच्चों को प्लेन से भेजा जाता है.
उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि कोटा के बच्चों को जांच कर कर क्यों नहीं भेजा जा सकता है और अगर इसके बावजूद नीतीश कुमार बच्चों को बॉर्डर पर रोकते हैं तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है नीतीश कुमार पर इसके लिए कभी माफी नहीं मिलेगी.

पप्पू यादव ने आगे कहा कि
3 मई तक लॉकडाउन बढ़ा दिया गया लेकिन मुझे समझ में नहीं आता है कि इससे क्या होगा 21 दिनों में क्या हो गया है. इसका मतलब है कि समुचित जांच हो प्रॉपर तरीके से जांच हो लेकिन यहां इस वक्त कुछ नहीं हो रहा है, ना तो कोई तैयारी है. टेस्टिंग किट तो बहुत ही कम हैं. आपके पास लैब नहीं है.
पप्पू यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 18 करोड़ लोग हैं लेकिन सिर्फ 10,000 का जांच हुआ है. बिहार में भी जो जनसंख्या उसके मुकाबले बहुत कम जांच हुआ है.
उन्होंने कहा कि आप 19 दिनों में जो करेंगे, उसकी तैयारी पर आपने कुछ बताया नहीं. लॉकडाउन में इलाज और भूख से जो जूझ रहे हैं, इन सब पर प्रधानमंत्री को जरूर बोलना चाहिए.
बुजुर्गों का ख्याल वैसे भी भारत की संस्कृति में है.

आप कहते लोगों को खाना खिलाना जब हमारे घर में खाना नहीं बच रहा तो हम कैसे खिलाएंगे. आप कह रहे नौकरी से नहीं निकालना तो आधा से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाला जा रहा है. नौकरी से निकालने पर आप एक नोटिस जारी करते हैं अब वैधता नहीं है नैतिकता है तो जब आप खुद ही वैधता को हटा रहे हैं तो आप कैसे यह उम्मीद करते हैं कि लोगों को नौकरी से नहीं हटाया जाएगा.





