बिहार (Bihar) के जमालपुर में मौजूद रेलवे के ट्रेनिंग सेंटर इंडियन रेलवे इंस्टिट्यूट ऑफ मेकैनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (IRIMEE) को लखनऊ शिफ्ट करने के फैसले पर सियासी घमासान मच गया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) ने इस मामले पर ट्वीट कर इसे बिहार की अस्मिता से जोड़ दिया है. सिन्हा ने बिहार के लोगों से इस मसले पर विरोध करने की अपील की है. सूत्रों के मुताबिक इस मामले में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर ये फैसला रद्द करने की मांग की है.

वर्ष 1888 में एक ट्रेनिंग स्कूल के तौर पर शुरू हुआ
मुंगेर जिले के जमालपुर स्थित इंडियन रेलवे इंस्टिट्यूट ऑफ मेकैनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियर यानी IRIMEE रेलवे के सबसे पुराने ट्रेनिंग सेंटर में से एक है. अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1888 में यह एक ट्रेनिंग स्कूल के तौर पर शुरू हुआ था. बाद में 1927 से यहां मेकेनिकल के ऑफिसर्स की ट्रेनिंग भी शुरू की गई थी.

बिहार में इसे लेकर सियासत शुरू
इस ऐतिहासिक ट्रेनिंग सेंटर को बिहार से बाहर ले जाने के फैसले पर बवाल मचना जाहिर सी बात है. यह साल बिहार विधानसभा चुनाव के लिहाज से भी काफी अहम है, ऐसे में इस मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है. पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिंहा ने इस मामले में बिहार के लोगों से संघर्ष करने की अपील कर डाली है.
It is most unfortunate that govt of India has ordered the transfer of the decades old Rly Training Institute at Jamalpur in Bihar to Lucknow in UP. Doing it during lockdown makes it worse. Bihar must fight back.
— Yashwant Sinha (@YashwantSinha) May 5, 2020
न्यूज़ 18 हिंदी ने इस मामले में रेलवे का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन खबर लिखे जाने तक रेलवे की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई. दरअसल जमालपुर का ट्रेनिंग सेंटर बिहार के लिए गौरव की बात रही है. साल 2016 में UPSC की परीक्षा से भरे जाने वाले SCRA अधिकारियों की नियुक्ति रेलवे ने बंद करा दी थी. उससे पहले जमालपुर SCRA की ट्रेनिंग का बड़ा केंद्र था, जो रेलवे में बहुत प्रतिष्ठित रहा है.

हालांकि, उसके बाद भी यहां हर साल हजार से ज्यादा नॉन गजेटेड अफसरों की इन-सर्विस ट्रेनिंग होती रही है, जिसमें मालगाड़ी के डिब्बों, रेलवे व्हील, इंजन, कोच और फायर सेफ्टी जैसे सब्जेक्ट की ट्रेनिंग दी जाती है. इसके अलावा हर साल यहां रेलवे को समझने के लिए कई अधिकारियों को ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है.
जमालपुर के लिए कनेक्टिविटी बेहतर नहीं
जमालपुर रेलवे वर्कशॉप की वजह से यह काम यहां आसानी से हो जाता है, लेकिन सूत्रों की मानें तो जमालपुर की कनेक्टिविटी बेहतर नहीं होने की वजह से, खास कर यहां न तो एयरपोर्ट है और न हवाई जहाज की सुविधा इसलिए अफसर यहां आने से कतराते हैं. कोचिंग के लिए बाहर से प्रोफेसर वगैरह भी यहां आने को जल्दी तैयार नहीं होते.

वहीं, रेलवे के पास वाराणसी और लखनऊ जैसे जगहों में अपनी विशाल जमीन मौजूद है. इन शहरों में हवाई जहाज की सुविधा भी है. साथ ही बनारस का DLW या लखनऊ के पास रायबरेली का मॉडर्न कोच फैक्ट्री भी मौजूद है, जहां पर ऑफिसर्स को प्रैक्टिकल चीजें भी दिखाई-समझाई जा सकती हैं. देखना होगा कि बिहार के लिए चुनावी साल में ये मुद्दा और कितना गर्म होता है.
Input : News18





