नेपाली सेना के चंगुल से रिहा हुए लगन यादव ने कहा कि हिरासत में लेने के बाद नेपाली सेना के जवानों ने ठीक व्यवहार नहीं किया। उन्होंने कहा कि नेपाली जवानों ने भारतीय सीमा के अंदर घुसकर जबरन उससे रायफल और बूट से पीटते हुए नेपाल के अंदर ले गये।

उन्होंने बताया कि नेपाली जवान उन्हें महोतरी के संग्रामपुर थाना ले गए। वहां उनकों लगातार प्रताड़ित किया गया। नेपाली जवान बार-बार नेपाली चौकी लूटने की बात कबूल कराने का दवाब बना रहे थे। लेकिन, उसके इंकार करने पर रायफल और बूट से मारते रहे। नेपाली जवानों ने उन्हें आठ घंटे भूखा रखा।

लगन अपने शरीर पर निशान को दिखाते हुए बताया कि वें बार-बार नेपाली सेना के समक्ष छोड़ने की गुहार लगा रहें थे। लेकिन, जवान हरबार उनके साथ मारपीट करता रहा। लगन यादव का पूरे शरीर पर पड़े दाग नेपाली पुलिस की बर्बता को बयां कर रही थी।

लगन ने बताया कि वह खेत काम कर रहें थे। खेत से कुछ दूरी पर ही भारतीय सीमा के समीप नो मेंस लैंड पर नेपाल के महोतरी जिले के गुलरिया गांव से उनके समधी दशरथ राय और समधीनी जयकुमारी देवी अपनी पुत्री से मिलने आयी थी। इधर, उनकी पुतोह अंचला देवी अपनी सास शैलेन्द्र देवी के साथ मिलने के लिए नो मेंस लैंड पर गयी थी। जहां नेपाली सेना के जवानों ने मिलने से रोक दिया। इसपर उनकी पत्नी और पुतोह द्वारा थोड़ी देर मिलने की बात कही गई। इसपर जवानों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी।

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