राष्ट्रीय जनता दल ने आखिरकार अपने विधान परिषद उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी। जिन तीन चेहरों को विधान परिषद भेजा जा रहा है उनमें लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का चेहरा शामिल नहीं है। तेज प्रताप यादव विधानसभा चुनाव लड़ने की बजाय इस बार परिषद जाना चाहते थे। तेज ने इसके लिए अपने पापा लालू यादव को मना भी लिया था। खुद लालू यादव ने कहा था कि तेज प्रताप यादव को विधानपरिषद भेजकर सेफ दिया जाए लेकिन ऐन वक्त पर उनका पत्ता साफ हो गया। सभी उम्मीदवार निकल गए और तेज बाबू लटक गए।

दरअसल तेज प्रताप यादव के उम्मीदवारी को लेकर ही आरजेडी के अंदर पेच फंसा हुआ था। मामला परिवार के अंदर था लिहाजा उम्मीदवारों के नाम की घोषणा में देरी हुई। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बता रहे थे कि उम्मीदवारों के नाम का ऐलान सोमवार कि शाम ही हो गया रहता लेकिन तेज प्रताप यादव के परिषद जाने या नहीं जाने के बीच कन्फ्यूजन को लेकर इसमें देरी हुई। लगातार आरजेडी के अंदर से यह खबरें आ रही थी कि तेज प्रताप यादव को लालू यादव विधान परिषद भेजना चाहते हैं। लालू यादव को इस बात का डर सता रहा है कि तेज प्रताप अगर विधानसभा चुनाव में उतरे तो उनके खिलाफ बहू ऐश्वर्या भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं, ऐसे में तेज प्रताप को फजीहत झेलनी पड़ सकती है। तेज को इसी फजीहत से बचाने के लिए लालू उन्हें परिषद भेजना चाहते थे लेकिन लालू यादव के छोटे बेटे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इस फैसले से सहमत नहीं थे। अंदरूनी सूत्रों की मानें तो तेजस्वी नहीं चाहते थे कि विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह मैसेज जाए कि राज्यसभा या परिषद में लालू परिवार का कोटा फिक्स है। तेजस्वी लगातार लालू यादव को यह समझा रहे थे कि तेज को विधान परिषद भेजने से पार्टी और परिवार एक बार फिर से विरोधियों के निशाने पर आ जाएगी।

आरजेडी की तरफ से दो उम्मीदवारों का नाम पहले से ही तय था। सुनील सिंह और फारुख शेख के नाम पर कोई संशय नहीं था लेकिन तीसरा उम्मीदवार लालू परिवार से हो या अति पिछड़ा तबके से आने वाला कोई और चेहरा इसको लेकर खींचतान चलती रही। मंगलवार को आरजेडी के 5 विधान पार्षदों के पाला बदलने के बाद तेजस्वी यादव की बात से आरजेडी सुप्रीमो भी सहमत हो गए और आखिरकार तेजप्रताप यादव का पत्ता कट गया। अब तेज प्रताप यादव विधानसभा चुनाव लड़ेंगे, सीट महुआ होगी या कोई और यह फिलहाल नहीं पता लेकिन इतना तय है कि पैराशूट से लेकर कॉपरेटिव तक के दिग्गज विधान परिषद चले गए और लालू के बड़े लाल परिवार से लेकर पार्टी तक में सबसे कमजोर कड़ी साबित हो गए। सियासी जानकार मानते हैं कि तेज प्रताप खुद को परिषद नहीं भेजे जाने के फैसले पर देर-सबेर अपनी प्रतिक्रिया जरूर देंगे। अब इंतजार इस बात का है कि तेज जब जुबान खोलेंगे तो क्या बोलेंगे।

Input : First Bihar

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