पर्वतपुरुष दशरथ मांझी के नक्शेकदम पर चलते हुए गया में 20 साल में पांच किलोमीटर लंबी नहर (सिंचाई के लिए खोदी गई छोटी नहर) एक अकेले शख्स ने खोद दी। जज्बे और जुनून का ये काम किया है गया के लौंगी भूईंया ने। लौंगी ने बीस वर्षों में इमामगंज और बांकेबाजार प्रखंड की सीमा पर पांच किलोमीटर लंबी, चार फीट चौड़ी व तीन फीट गहरी नहर खोद दी। उनके कारनामे के चर्चे जब आम हुए तो मदद के लिए हाथ में बढ़ने लगे। अब लौंगी को महिंद्रा समूह के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आनंद महिंद्रा ने शनिवार की सुबह ट्रैक्टर देने का वादा किया। शाम होते-होते गया में महिंद्रा ट्रैक्टर्स के अधिकृत डीलर सिद्धार्थ ट्रैक्टर्स के प्रॉपराइटर (proprietor) सिद्धि नाथ के तरफ से लौंगी भूईंया को एक महिंद्रा ट्रैक्टर भेंट किया गया। इस अवसर पर महिंद्रा के स्टेट हेड  आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि ट्वीट के माध्यम से महिंद्रा कंपनी के हेड आनंद महिंद्रा ने लौंगी भूईंया को ट्रैक्टर देने का वायदा किया था जिसे तुरंत पूरा किया गया। यह हमारा सौभाग्य है कि लौंगी भूईंया जैसे कर्मयोद्धा अब महिंद्रा ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर पईन के बचे हुए कार्य को पूरा करेंगे।

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लौंगी भूईंया ने कहा कि ट्रैक्टर पाकर उन्हें अत्यंत खुशी मिली है। इसकी मदद से वे अपने कार्यो को और भी सुगमता और तेजी से कर सकेंगे। इस अवसर पर महिंद्रा कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक अभयमनी भी उपस्थित थे।

आनंद महिंद्रा बोले- ट्रैक्टर देने में गर्व महसूस होगा

शनिवा को ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा-गया के लौंगी भुईंया ने अपनी जिंदगी के कई वर्ष लगाकर नहर खोद दी। उन्हें कुछ नहीं चाहिए, सिवाए एक ट्रैक्टर के। यूजर ने आगे लिखा कि मेरी आनंद महिंद्रा से मांग है कि वो लौंगी को सम्मानिक करें, इससे उन्हें गर्व महसूस होगा। इस पर आनंद महिंद्र ने लिखा, लौंगी की नहर ताज महल से कम नहीं है। हमें लैंगी को ट्रैक्टर देने में गर्व महसूस होगा, बताएं कैसे आपतक पहुंचा जाए।

कुदाल, खंती व टांगी लेकर निकल पड़े

बताते चलें कि लौंगी भुईंया ने भी बीस वर्षों में इमामगंज और बांकेबाजार प्रखंड की सीमा पर पांच किलोमीटर लंबी, चार फीट चौड़ी व तीन फीट गहरी नहर खोद दी। दैनिक जागरण से बातचीत में लौंगी ने बताया, सिंचाई का साधन होता तो लोग अच्छी खेती कर सकते थे। यह बात उनके दिमाग में घूम रही थी। वे जंगल में रोज पशुओं को चराने ले जाते थे। उन्होंने देखा कि एक जगह सारे पशु पानी पीने जाते हैं। वहां पर जलस्रोत था, पानी यूं ही बह रहा था। बस यहीं से नहर खोदने का विचार दिमाग में आ गया। वे दूसरे दिन से ही हाथों में कुदाल, खंती व टांगी लेकर निकल पड़े।

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बनवाई मेड़, नाम रखा लौंगी

65 साल के हो चुके लौंगी की पत्नी रामरती देवी ने उन्हें कभी रोका-टोका नहीं। खोदाई शुरू की तो लोग हंसने लगे कि लौंगिया पगला गया है। लेकिन उन्होंने अपना काम जारी रखा। आज करीब पांच किलोमीटर लंबी नहर बन चुकी है। उनके कार्य को देख जलछाजन विभाग के अधिकारियों ने एक बड़ी मेड़ बनवा दी है, जिसका नाम लौंगी आहर रखा है।

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Source : Dainik Jagran

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