वक्त था साल 2012 का। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी अधिकार यात्रा के दौरान एक कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे और अचानक इस कार्यक्रम में कुछ शिक्षक विरोध प्रदर्शन करने लगे। उसी वक्त सीएम के सामने ही एक शख्स हाथ में बंदूक लहराने लगा, पहले उसने प्रदर्शनकारी शिक्षकों को शांत रहने की धमकी दी और फिर उन्हें डराने के लिए नीतीश कुमार के सामने ही फायरिंग कर दी। फायरिंग के बाद समारोह में उथलपुथल मच गई लेकिन क्या मजाल की इस दबंग को कोई कुछ कर पाए।

आज हम बात कर रहे हैं बिहार की राजनीति में बाहुबली के नाम से विख्यात रणवीर यादव की। बिहार का खगड़िया जिला दियारा क्षेत्र में पड़ता है और इस इलाके में कभी रणवीर यादव के नाम का सिक्का चलता था। लालू प्रसाद यादव हों या नीतीश कुमार रणवीर यादव सभी बड़े सियासी चेहरों के करीबी रह चुके हैं। दबंग कहे जाने वाले रणवीर यादव के सियासी सफर पर आपको हम आगे ले चलेंगे पहले खंगालते हैं इस बाहुबली की क्राइम कुंडली।

रणवीर यादव का नाम साल 1985 में मुंगेर के लक्ष्मीपुर-तौफीर दियारा में हुए एक नरसंहार में सबसे पहले उछला था। इस नरसंहार में 9 लोगों की बेरहमी से हत्या की गई थी और रणवीर यादव को सीधा आरोपी बनाया गया था। बाद में अदालत ने इस मामले में रणवीर को दोषी पाया और सजा भी दी। 9 साल तक जेल में रहने के बाद राज्य सरकार ने रणवीर यादव की सजा माफी का ऐलान किया था।

इस मामले में जेल की सजा काट चुके रणवीर यादव पर रंगदारी, हत्या का प्रयास, धमकाने समेत दर्जनों मामले दर्ज हैं। जिसपर कानूनी कार्रवाई चल रही है। इस नरसंहार के बाद रणवीर यादव पर साल 1988 में एक और संगीन अपराध को अंजाम देने का आरोप लगा। आरोप लगा था कि 8 दिसंबर को उन्होंने खगड़िया में अपने गांव चुकती में राइफल से अपने चचेरे भाई सुनील यादव को गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया था। इस मामले में भी अदालत ने रणवीर यादव को सजा सुनाई।

Input: Jansatta

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