बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Assembly Election 2020) न केवल कोरोना जैसी विषम स्थिति में होने वाले चुनाव के रूप में जाना जाएगा वरन सीटों के बंटवारे को लेकर हो रहे विवादों के लिए भी याद किया जाएगा। बात एनडीए की हो या महागठबंधन की। किसी की स्थिति सहज नहीं कही जा सकती।चर्चा यदि महागठबंधन की हो तो यहां स्थिति अधिक जटिल नजर आ रही। ऐसे में संभावित प्रत्याशियों की सांसें अटकी पड़ी हैं। मुजफ्फरपुर की स्थिति अलग नहीं है।
स्थिति यह है कि महागठबंधन से जुड़े दलों के जिला कार्यालयों में सन्नाटा पसरा है। सभी संभावित प्रत्याशी या खुद को दावेदार मान रहे नेता दिल्ली के बाद अब पटना में डेरा डाले हैं। पार्टी के वरीय नेताओं की हो रही बैठक के बाद बनते -बिगड़ते समीकरण के हिसाब से इन नेताओं की सांसों की गति घटती-बढ़ती है।
सूत्रों की मानें तो मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और वीआइपी (VIP) के बीच छह, तीन और दो के समीकरण पर बात चल रही है। हालांकि यह आधिकारिक नहीं है। सबसे अधिक पेच उन सीटों पर है जो वर्ष 2015 के चुनाव में जदयू के हिस्से में था। मुजफ्फरपुर नगर, बोचहां और कुढ़नी। ये ऐसी सीटेें हैं जिस पर राजद, कांग्रेस और वीआइपी तीनों की ओर से ही दावे आ रहे हैं। वैसे राजद का दावा उन सीटों पर ताे है ही जहां से राजद ने पिछले चुनाव में जीत हासिल की थी। एक और सीट पर सभी की नजर है। वह है गायघाट। यूं तो वर्ष 2015 के चुनाव में राजद ने इस सीट पर जीत हासिल की थी लेकिन, इस बार समीकरण अलग है। वहां के वर्तमान विधायक को राजद ने पार्टी से निकाल दिया और वे अब जदयू में शामिल हो गए हैं। ऐसे में यह सीट किसके हिस्से में जाएगी। इस पर सबकी नजर है।
Input: Dainik Jagran






