पटना. पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय  (Gupteshwar Pandey ) को एनडीए (BJP-JDU) से टिकट नहीं मिलने पर बिहार में सियासत शुरू हो गई है. कांग्रेस ने इस पर सीधा ब्राह्मण कार्ड खेल दिया है और पार्टी के नेता प्रेमचंद्र मिश्र (Premchandra Mishra) ने तंज कसते हुए उनके (गुप्तेश्वर पांडेय) गलत पार्टी में शामिल होने की बात कही है. कांग्रेस (Congress) नेता ने कहा कि गुप्तेश्वर पाण्डेय (ब्राह्मण) जैसे लोगों के लिए जदयू बनी ही नहीं है. जदयू ने कभी ब्राह्मणों के लिए कुछ नहीं किया. इन्हें दूसरा रास्ता तलाशना चाहिए. वहीं जदयू ने बचाव करते हुए कहा कि सिर्फ टिकट के बिना पर किसी की राजनीति को नहीं समझना चाहिए. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व आगे की जिम्मेदारियों को तय करेंगे.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में टिकट नहीं मिलने के बाद पूर्व डीजीपी ने पहली बार मीडिया से बात की. गुप्तेश्वर पांडेय ने बिहार की किसी भी विधानसभा सीट से चुनाव का टिकट नहीं मिलने के मसले पर कहा कि राजनीति में कभी-कभी ऐसा होता है कि जैसे आप सोचते हैं वो नहीं होता. मैं पार्टी का सजग सिपाही हूं. मैं ठगा नहीं गया हूं, क्योंकि बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) किसी को ठगते नहीं हैं.

गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि राजनीति में बहुत सारी मजबूरियां होती हैं. अब एनडीए को सोचना है कि मैं क्या करूंगा, लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूं. बहरहाल गुप्तेश्वर पांडेय का टिकट कटने पर जो भी सियासत हो, लेकिन आंकड़े बताते है कि सीट बंटवारे में अधिकतर राजनीतिक दलों ने ब्राह्मणों को हिस्सेदारी देने से परहेज ही किया है.

बिहार में जाति आधारित आबादी प्रतिशत में
दरअसल, कांग्रेस के नेता जो दावा कर रहे हैं उससे भी यह बात जाहिर हो रही है. यहां तक कि आबादी के अनुरूप भी हिस्सेदारी नहीं दी गई है. पहले हम मोटे तौर पर विभिन्न जातियों की अनुमानित संख्या पर नजर डालते हैं. इसके तहत बिहार में अत्यधिक पिछड़ी जाति 21.1 प्रतिशत, मुस्लिम 14.7, यादव 14.4, ब्राह्मण 5.7, महादलित 10, दलित 4.2, कायस्थ 1.5, भूमिहार 4.7, राजपूत 5.2, कुर्मी 5.0 और बनिया 7.1 प्रतिशत हैं. बता दें कि ये सभी अनुमानित आंकड़े हैं. अब आइए हम एक नजर डालते हैं कि बिहार की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने किस जाति के उम्मीदवारों पर अधिक भरोसा जताया और किसे किनारे किया.

जदयू में हाशिये पर ब्राह्मण
जनता दल यूनाइटेड ने 115 सीटों में से सबसे अधिक 67 प्रत्याशी पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग से उतारे हैं. इनमें पिछड़ा वर्ग से 40 प्रत्याशी हैं. जिनमें सबसे ज्यादा 19 यादव, 12 कुर्मी और तीन वैश्य समुदाय के लोगों को टिकट दिया गया है. वहीं, अति पिछड़ा समुदाय से 27 प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें 8 धानुक और 15 कुशवाहा शामिल हैं. जदयू ने 115 सीटों में से 19 सीटें सवर्ण समुदाय के लोगों को दी है, जिनमें सबसे ज्यादा 8 भूमिहार, 7 राजूपत और दो ब्राह्मण प्रत्याशियों को टिकट दिया है. बिहार के अनुसूचित जाति समुदाय के उम्मीदवारों को 17 टिकट दिए हैं और अनुसूचित जनजाति को एक टिकट दिया है. इसके अलावा पांच अनुसूचित जाति वाली सीटें जीतनराम मांझी की पार्टी को दे रखी है. यही नहीं जेडीयू ने बिहार की 11 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं.

राजद ने बदला समीकरण
राजद ने पहले चरण की 42 सीटों में 19 यादव, तीन कोइरी, तीन मुस्लिम, एक-एक राजपूत, भूमिहार, ब्राह्मण, दो वैश्य, आठ अनुसूचित जाति, एक अनुसूचित जनजाति और तीन अति पिछड़ी जाति के प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है.

कांग्रेस में सवर्ण आगे पर ब्राह्मण किनारे
कांग्रेस ने पहले चरण की 21 सीटों पर प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा 14 का टिकट सवर्ण समुदाय को दिया है. इनमें भूमिहार को 6, राजपूत को 5, ब्राह्मण को 2 और कायस्थ प्रत्याशी 1 हैं. वहीं, एससी से 4, पिछड़ा वर्ग से 2 और मुस्लिम समुदाय को एक टिकट दिया है.

बीजेपी ने खेला सवर्ण दांव, पर ब्राह्मण यहां भी पीछे
बीजेपी ने पहले चरण की 27 उम्मीदवारों में सबसे अधिक 16 सीटों पर सवर्ण समुदाय से आने वाले चेहरे पर भरोसा जताया है, लेकिन ब्राह्मण उम्मीदवारों की संख्या यहां भी कम है. बीजेपी ने 7 टिकट राजपूत प्रत्याशियों को दिए गए हैं, 6 भूमिहार और 3 ब्राह्मणों को टिकट देकर अपने कोर वोटबैंक को साधने की कोशिश की है. साथ ही 3 यादव प्रत्याशियों को टिकट देकर बीजेपी ने आरजेडी के मूल वोट बैंक में सेंध लगाने का दांव चला है. इसके अलावा 3 अनुसूचित जाति, एक आदिवासी, एक वैश्य, एक बिंद, एक दांगी और एक चंद्रवंशी को बीजेपी ने टिकट दिया है. बीजेपी ने 5 महिला प्रत्याशी भी उतारे हैं और तीन नए चेहरे को भी टिकट दिया है.

Source : News18

Muzaffarpur Now – Bihar’s foremost media network, owned by Muzaffarpur Now Brandcom (OPC) PVT LTD