‘क्या लेकर आया है, क्या लेकर जाएगा। मुट्ठी बांधे आया था, हाथ पसारे जाएगा।’ इन पंक्तियों में जितना जीवन का मर्म छिपा है, उतना ही ढांढस देने का संदेश। कुछ ऐसा पटना में भी हुआ। दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का पार्थिव शरीर विशेष विमान से पटना एयरपोर्ट उतरा तो उनके अंतिम दर्शन के लिए वीवीआईपी का हुजूम उमड़ पड़ा था। सबसे पहले पुत्र चिराग पासवान ने पिता को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पिता और अपने नेता को श्रद्धांजलि देते समय लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान बिलख पड़े। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी ने तो पटना में विलखते चिराग को ढांढस बंधाने की जिम्मेदारी विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने निभाई

पटना के सूत्रों से प्राप्त जानकतारी के अनुसार तेजस्वी यादव ही एक मात्र ऐसे नेता भी रहे, जिन्होंने चिराग के परिवार के सदस्यों से भेंट की। वह चिराग के आस-पास बने रहे और पूरी आत्मीयता के साथ उन्हें ढांढस बधाया। यह याद रखने योग्य है कि कुछ ही दिन पहले चिराग ने भी तेजस्वी यादव को अपना छोटा भाई बताया था। उन्हें शुभकामना दी थी। निजी रिश्ते की यह केमिस्ट्री पटना में भी साफ दिखाई दी। कहते हैं दुख-दर्द का साथी ही असल साथी होता है।
राजकीय सम्मान के साथ शुरू हुई केंद्रीय मंत्री की अंतिम यात्रा
रामविलास पासवान को पटना में पूर्ण राजकीय सम्मान दिया गया। विशेष विमान से उनके पार्थिव शव को उतारे जारे के बाद सेना की विशेष टुकड़ी ने सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर दिया। भारतीय सेना के अधिकारियों ने दिवंगत नेता को सबसे पहले श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके बाद पुत्र चिराग ने पिता को अपनी श्रद्धांजलि दी।

राम विलास पासवान के भाई पशुपति पारस, नेता विपक्ष तेजस्वी यादव, केंद्र सरकार की तरफ प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने पुष्पचक्र अर्पित किया। श्रद्धांजलि देने वालों में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे समेत अन्य रहे। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी श्रद्धांजलि दी। सबसे अंत में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भावभीनी श्रद्धांजलि देकर रामविलास पासवान को अंतिम यात्रा के लिए विदा किया।

तेजस्वी यादव चले गए चिराग के परिवार के पास
सभी नेताओं ने राम विलास पासवान को श्रद्धांजलि दी और इसके बाद अपने यथास्थान की तरफ लौटकर आगे बढ़ गए। श्रद्धांजलि देने वालों में राज्य विधानसभा अध्यक्ष, तमाम मंत्री, विधायक और पक्ष-विपक्ष के नेता थे। तेजस्वी यादव को देखकर लग रहा था कि वह वास्तव में दुखी हैं। वह न केवल चिराग के पास रहे, उन्हें ढांढस बंधाया, बल्कि चिराग के परिवार के पास भी गए। सबसे उन्होंने दुख-दर्द को साझा किया। अपनी संवेदना व्यक्त की और उन्हें ढांढस बंधाया।

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