भगवान विष्णु की आराधना वाले अधिक मास के अनुष्ठानों की पूर्णाहुति 16 अक्तूबर को होगी। इसके बाद 17 अक्तूबर से आदि शक्ति स्वरूपा की आराधना का नौ दिवसीय शारदीय नवरात्र आरंभ होगा। इस नवरात्र में तिथि क्षय नहीं है। ऐसे में शारदीय नवरात्र पूरे नौ दिन का होगा। खास बात यह है कि इस बार महानवमी और दशहरा एक ही दिन पड़ेगा। इसी केसाथ त्योहारों की झड़ी लग जाएगी।

शारदीय नवरात्र के साथ ही चालू महीने त्योहारों की धूम मच जाएगी। त्योहारों की दृष्टि से यह महीना बहुत खास रहेगा। इस माह में नवरात्र, दशहरा के बाद शरद पूर्णिमा जैसे पर्व मनाए जाएंगे। बृहस्पतिवार को अधिक मास की पूर्णिमा पर भी विविध अनुष्ठान होंगे। अधिक मास तीन साल में एक बार आता है। इस वजह से इस बार की पूर्णिमा महत्वपूर्ण होगी।

ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्रा के अनुसार 19 वर्ष बाद पितृपक्ष के बाद अधिक मास लगने से इस बार का नवरात्र भी खास होगा। तिथि क्षय न होने से यह नवरात्र पूरे नौ दिन का होगा। 13 अक्तूबर को अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, तो 16 अक्तूबर को अधिक मास की अमावस्या होगी। इसी दिन अधिक मास खत्म होगा। 17 तारीख को आश्विन मास के आरंभ के साथ ही शारदीय नवरात्र में जगत जननी मां जगदंबा की आराधना के लिए कलश स्थापना होगी।

20 अक्तूबर को अंगारक विनायकी चतुर्थी और 24 अक्तूबर को दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन देवी दुर्गा की विशेष आराधना का महत्व है। इसी तरह 25 अक्तूबर को दुर्गा नवमी,27 अक्तूबर को पापांकुशा एकादशी और 30 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा पर महालक्ष्मी की पूजा होगी।

दुर्गा पूजा की अनुमति के लिए पूजा समितियां हलाकान
गाइड लाइन जारी होने के बाद दुर्गा पूजा के पंडाल और प्रतिमाओं की स्थापना की अनुमति के लिए पूजा समितियों के पदाधिकारी अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। अब तक किसी भी पूजा समिति को पंडाल लगाने की अनुमति नहीं मिली है। बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव डॉ पीकेराय ने इस पर चिंता जताई है। उन्होंने रविवार को डीएम भानुचंद्र गोस्वामी को पत्र भेजकर पूजा के लिए अनुमति देने का आग्रह किया है, ताकि समय रहते तैयारियां पूरी की जा सकें।

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