पटना. 20 जुलाई 2020… यही वह तारीख है जब चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने अपना आखिरी ट्वीट किया था. इसमें उन्होंने कोरोना वायरस (COVID-19) के खतरों से आगाह किया था और राजनीति पर कोई बात नहीं की थी. सबसे खास बात यह रही कि इसके बाद भी बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर सूबे में सियासी गतिविधियां लगातार रहीं पर सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से जुदा होने के बाद बिहार को बदल देने के दावा करने वाले प्रशांत किशोर की ओर से कोई हलचल नहीं रही. आलम यह रहा कि वे सोशल मीडिया (Social media) पर भी एक्टिव नहीं रहे.

बिहार के राजनीतिक जानकार बताते हैं कि प्रशांत किशोर के लिए बिहार में राजनीति का आधार ही नीतीश कुमार और उनकी विकासवादी राजनीति रही थी. यही वजह थी कि बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है! पिछले विधानसभा चुनाव (2015) में ठेठ बिहारी बातचीत की शैली में बने इस स्लोगन को पीके ने गढ़ा था. लेकिन पिछले कुछ महीनों से बिहार से अचानक उनका गायब हो जाना, चर्चा का विषय बना हुआ है.

पीके की सियासत का आधार थे नीतीश

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि उनकी हर नीति में भी सिर्फ और सिर्फ नीतीश ही नीतीश थे. अब जब नीतीश से ही अलगाव हो गया तो दूसरे चेहरे को प्रोमोट करने की कवायद भी की थी, पर महागठबंधन में आपकी एकजुटता का अभाव रहा और कुशवाहा, मांझी एवं सहनी के छूटने के बात प्रशांत किशोर ने खुद को बिहार की सियासी लड़ाई से पीछे हटा लिया था.

क्या तेजस्वी की रणनीति के पीछे हैं पीके?

हालांकि एक चर्चा यह भी है कि इस बार के चुनाव में भी तेजस्वी की सधी राजनीति के पीछे पीके की बात कही जा रही है, लेकिन इस खबर की पुष्टि तो नहीं की जा सकी है. पर यह बात साफ है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में जिस तरह से महागठबंधन ने लड़ाई लड़ी है इससे यह बात साफ है कि चुनावी रणनीति बड़ी ही गहराई से बनाई गई है. ऐसे में पीके ने तेजस्वी को सलाह नहीं दी होगी, यह भी नहीं कहा जा सकता है.

बिहार के सियासी विमर्श में मौजूद हैं पीके

इस बीच यह भी चर्चा रही कि बिहार चुनाव की गहमागहमी के बीच प्रशांत किशोर कोरोना लॉकडाउन के दौरान ही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की ‘मिशन बंगाल’ के लिए निकल गए थे. दरअसल बिहार चुनाव के बाद तो आगे एनडीए खेमा के लिए बंगाल का चुनाव बेहद अहम होने वाला है, ऐसे में प्रशांत किशोर की व्यस्तता वहां बताई जा रही है. पर यह साफ है कि बिहार के विमर्श में अब भी पीके मौजूद हैं.

Source : News18

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