बिहार चुनाव का दूसरा चरण समाप्त होते ही स्वतंत्र पत्रकार ने तर्कों के साथ बता दिया था कि इस बार फिर से एनडीए की सरकार बनेगी. अभिषेक ने यह भी लिखा था कि नीतीश को होगा नुकसान और भाजपा सबसे बड़ी दल बनेगी. 5 नवंबर को अभिषेक रंजन के पोस्ट यह था- जो अब भी उनके फ़ेसबुक टाइमलाइन पर है. अभिषेक रंजन का पोस्ट-
मुख्यमंत्री बनने की रेस से दूर हो गये तेजस्वी- नीतीश की जीत सुनिश्चित –
राजद दो चरण के मतदान के बाद सत्ता के दौर से दूर हो गयी है और तीसरे चरण के बाद पूर्णतः बाहर हो जायेगी. राजद और महागठबंधन के मठाधीशो को इस बात का एहसास भी हो गया है- इसलिये इनके मठ के सबसें बुजुर्ग महंथ राहुल गांधी अभी से ईवीएम में गड़बड़ी का विधवा विलाप शुरू कर चुके है. लालू के लाल का सपना टूटते देख सब लाल- पीले होने लगे है. इलेकट्रॉनिक वोटिंग मसीन को अब हार के हताश में पप्पू सेना मोदी वोटिंग मसीन कहने लगी है. सपष्ट रूप से नीतीश कुमार की वापसी दिख रही है.

महागठबंधन के लोग बस फर्जी हवा बनाने में लगे है. जिन्हें लगता है कि तेजस्वी की स्थिति मजबूत है वो किसी गफ़लत में नहीं रहे – बिहार के लोग अन्य राज्य के लोगों से थोड़े अधिक भगवान और धर्म में विश्वास रखते है- राम मंदिर निर्माण और 15 साल में हुये विकास के तर्ज पर लोगो ने फ़िर राजग पर भरोशा दिखाया है. इस बात से हम इंकार नहीं कर सकते है कि नीतीश कुमार से लोगों की थोड़ी बहुत नाराज़गी है.
बिहार में जो परिणाम होंगे उसमें भाजपा सबसे बड़ी दल बनकर उभरेगी – परिणाम अप्रत्याशित होंगे अंततः नीतीश अपने पद पर काबिज़ होंगे – पुराने लोग कहते है की लालटेन का बटन दबाने में मन नही मानता – सोच के जाते है कि लालटेन को दे देंगे लेक़िन अंदर जावे पर भाजपा और नीतीश के बटन दबा देते है. लालू के दौर को याद कर अब भी लोग सहम जाते है. यहीं राजद के हार का कारण बन रहा है.





