बिहार में भाजपा अपना उप मुख्यमंत्री बदल सकती है, भाजपा के सूत्रों के संकेतों की माने तो सुशील मोदी को अलग जगह शिफ्ट किया जा सकता है और बिहार में उप मुख्यमंत्री का पद कामेश्वर चौपाल को दिया जा सकता है.

कामेश्वर चौपाल बिहार के एक दलित चेहरा है जो राम मंदिर निर्माण में बेहद सक्रीय थे. राम मंदिर निर्माण के कार्यो में कामेश्वर चौपाल वो पहले इंसान थे जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में पहली ईट रखी थी.

कामेश्वर चौपाल प्रभू श्री राम के अनन्य भक्त है.कामेश्वर चौपाल दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. 1989 के राम मंदिर आंदोलन के समय हुए शिलान्यास में कामेश्वर ने ही राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी. आरएसएस ने उन्हें पहले कारसेवक का दर्जा दिया है. वह 1991 में रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव भी लड़ चुके हैं.

कामेश्वर चौपाल ने अपनी पढ़ाई-लिखाई मधुबनी जिले से की है. यहीं वे संघ के संपर्क में आए थे. उनके एक अध्यापक संघ के कार्यकर्ता हुआ करते थे. संघ से जुड़े उसी अध्यापक की मदद से कामेश्वर को कॉलेज में दाखिला मिला था। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही वे संघ के प्रति पूरी तरह से समर्पित हो चुके थे. इसके बाद उन्हें मधुबनी जिले का जिला प्रचारक बना दिया गया था.

1989 में विहिप ने किया था शिलान्यास

नवंबर 1989 में राम मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम रखा गया था. उस समय कामेश्वर चौपाल अयोध्या में ही मौजूद थे. वे एक टेंट में रह रहे थे. उनके कमरे में विहिप के तत्कालीन प्रमुख अशोक सिंघल के एक करीबी व्यक्ति आए और उन्हें बताया कि आपको शिलान्यास के लिए चुना गया है. इसके बाद चौपाल ने ही राम के मंदिर निर्माण की पहली ईंट रखी थी.

ऐसा रहा है राजनीतिक करियर

कामेश्वर चौपाल ने 1991 में लोक जनशक्ति पार्टी के दिवंगत नेता रामविलास पासवान के खिलाफ चुनाव लड़ा था. हालांकि वे हार गए थे। 2002 में वे बिहार विधान परिषद के सदस्य बने. 2014 में भाजपा ने उन्हें पप्पू यादव की पत्नी रंजीता रंजन के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन यहां भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली.

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