लोकआस्था का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान 18 नवंबर यानि बुधवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो जाएगा। गुरुवार को व्रती खरना पूजन करेंगे। वहीं भगवान भास्कर को सायंकाल अर्घ्य शुक्रवार को दिया जाएगा। शनिवार सुबह में उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके साथ ही यह अनुष्ठान संपन्न हो जाएगा।

दिवाली खत्म होने के साथ ही छठ व्रत की हर कोई तैयारियों में पूरी तरह जुट गया है। कोई मन्नते पूरी होने पर तो कोई मन्नत पूरी होने की आस लेकर इस अनुष्ठान को पूरी आस्था के साथ करने की तैयारी में है। कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर जो लोग नदी-घाटों पर अर्घ्य देने नहीं जा सकेंगे। उन लोगों ने अपने मोहल्ले व छतों पर कृत्रिम घाट बनाना शुरू कर दिया है। घरों में खरना का प्रसाद व ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं की धुलाई कर उसे सुखाया जा रहा है।

इसके साथ ही पवित्रता के साथ प्रसाद बनाने की परंपरा को लेकर मिट्टी के चूल्हे भी बनाए जा रहे है। सोमवार को गोधन पूजा के बाद जिन छठ व्रतियों ने भीक्षा मांगकर छठ व्रत करने का संकल्प लिया होगा, वे व्रती भिक्षा लेने को निकल पड़ेंगे। पं. जयकिशोर मिश्र व पं. सुनील झा बताते है कि यह व्रत आरोग्य की प्राप्ति, सौभाग्य व संतान के लिए रखा जाता है। इस व्रत में संतान के रूप में बेटियों को छठी माता से मांगा जाता है।

Input: Live Hindustan

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