पटना/सीवान. बिहार के बाहुबली पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन (Mohammed Shahabuddin) के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले और उन्हें तिहाड़ जेल पहुंचाकर दम लेने वाले चंदेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू (Chandeshwar Prasad alias Chanda Babu) का निधन हो गया. सीवान में हुए चर्चित तेजाब कांड के खिलाफ चंदा बाबू ने लड़ाई लड़ी थी, जिसके बाद शहाबुद्दीन पर एक्शन हुआ था. चंदा बाबू की जिंदगी बेहद दर्दभरी रही. शहर के प्रसिद्ध व्यवसायी चंदा बाबू ने सीवान के बहुचर्चित तेजाब हत्याकांड मामले में अपने दो बेटों को खो दिया था, जबकि तीसरे बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इसी तेजाब हत्याकांड के मुख्य गवाह चंदा बाबू ही जिंदा बचे थे. उन्होंने अपने बेटों की हत्या के आरोपित शहाबुद्दीन के ि‍खिलाफ कानून लड़ाई लड़ कर पूर्व सांसद को तिहाड़ जेल भिजवाया.

bihar news chanda babu who fought a tough battle with bahubali leader  shahabuddin passes away in siwan tezab kand upl | Bihar News: सीवान के  पूर्व सांसद और बाहुबली नेता शहाबुद्दीन से

चंदा बाबू के दो बेटों पर सरेआम तेजाब डाल दिया

चंदा बाबू सीवान के जाने-माने व्‍यवसायी थे. वर्ष 2004 में जब कुछ बदमाशों ने उनसे रंगदारी मांगी थी, तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया था. चंदा बाबू के इस इनकार के बाद उनके जीवन में सबकुछ बदल गया. दरअसल, जब बदमाशों ने रंगदारी मांगी, तो चंदा बाबू का बेटा दुकान पर था. चंदा बाबू के तीन बेटों गिरीश, सतीश और राजीव का अपहरण कर लिया गया. इसी बीच चंदा बाबू के बेटों की बदमाशों से कहासुनी हुई और बदमाशों ने चंदा बाबू के दोनों बेटों पर तेजाब डाल दिया.

chanda babu who fought a tough battle with strong man shahabuddin died in  siwan - शहाबुद्दीन से लोहा लेने वाले सीवान के चंदा बाबू नहीं रहे, कई दिनों  से तबीयत थी खराब

लंबे वक्त तक चली चंदा बाबू-शहाबुद्दीन की कानूनी लड़ाई

बदमाशों ने गिरीश और सतीश को तेजाब से नहला कर मार दिया था, जबकि इस मामले का चश्मदीद चंदा बाबू का छोटा बेटा राजीव किसी तरह बदमाशों की गिरफ्त से अपनी जान बचाकर भाग निकला. इस तेजाब हत्याकांड में पूर्व बाहुबली सांसद मो शहाबुद्दीन का नाम आया था. इसी के बाद चंदा बाबू ने शहाबुद्दीन के खिलाफ कानूनी लड़ाई की शुरुआत की थी, जो 2004 से शुरू होकर लंबे वक्त तक चली.

तब सबने कहा था…छोड़ दीजिए सीवान

जानकार लोग बताते हैं कि वर्ष 2004 में जब घटना घटी थी तो चंदा बाबू पटना गए हुए थे. शुभचिंतकों ने चंदा बाबू को बार-बार कहा कि वे सीवान न आएं, नहीं तो उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया जाएगा. बेटों की मौत के बाद चंदा बाबू किसी तरह सीवान पहुंचे. इंसाफ के लिए एसपी की चौखट पर गए, लेकिन मिलने नहीं दिया गया था. थक हारकर चंदा बाबू थाने पहुंचे तो वहां दारोगा ने कहा कि आप फौरन सीवान छोड़ दीजिए. तब अफसरों से लेकर नेताओं तक की चौखट छान ली थी, लेकिन किसी ने मदद नहीं की. बावजूद इसके चंदा बाबू ने हार नहीं मानी.

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मो. शहाबुद्दीन को सलाखों के पीछे पहुंचाकर ही माने चंदा बाबू

चंदा बाबू के तीसरा बेटा राजीव भाइयों के तेजाब से हुई हत्याकांड का गवाह बना था, लेकिन 2014 में सीवान शहर के डीएवी मोड़ पर उसकी भी गोली मार कर हत्या कर दी गई. गौरतलब है कि हत्या के महज 18 दिन पहले ही राजीव की शादी हुई थी. इतने जुल्मोसितम के बाद भी चंदा बाबू व उनकी पत्नी अपने एक अपाहिज बेटे के साथ सीवान में डटे रहे और बाहुबली से लंबी लड़ाई लड़ी और शहाबुद्दीन को सलाखों के पीछे पहुंचा कर ही दम लिया.

शहाबुद्दीन पर कार्रवाई में नीतीश सरकार का भी रहा अहम योगदान

बता दें कि जिस दौर में यह बहुचर्चित तेजाब कांड हुआ था उस वक्त बिहार में लालू-राबड़ी का शासनकाल था और बिहार में बाहुबलियों का दबदबा था. उस दौर में तब शहाबुद्दीन के नाम से पूरा इलाका कांपता था. तब शहाबुद्दीन को सभी ‘साहेब’ कहकर बुलाते थे. वर्ष 2005 में सत्ता में आने के बाद नीतीश सरकार ने शहाबुद्दीन पर कार्रवाई शुरू की. चंदा बाबू भी करीब डेढ़ दशक तक मोहम्मद शहाबुद्दीन से लड़ते रहे और पूर्व बाहुबली सांसद को सलाखों के पीछे पहुंचाने में कामयाब रहे.

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बाहुबली को हराकर चंदा बाबू भी जिंदगी की जंग हार गए

शहाबुद्दीन ने चंदा बाबू की हंसती खेलती दुनिया उजाड़ दी थी. डरी-सहमी चंदा बाबू की पत्नी, दोनों बेटियां और एक अपाहिज बेटा भी घर छोड़कर जा चुके थे. सारा परिवार बिखर चुका था. तीसरे बेटे को भी मार दिया गया था. हालांकि, अपने बेटों के लिए न्याय की इस लड़ाई में उनकी पत्नी भी कभी मौत के सामने झुकी नहीं. कुछ महीने पूर्व पत्नी की मौत के बाद चंदा बाबू अकेले हो गए थे और बुधवार (16 दिसंबर, 2020) को अचानक जिंदगी से जंग हार गए.

I stood up to Shahabuddin raj, so he set out to destroy me' | India  News,The Indian Express

16 तारीख से चंदा बाबू का रहा है खास नाता

बता दें कि 16 अगस्त 2004 को चंद्रकेश्वर प्रसाद के दोनों छोटे बेटे गिरीश और सतीश की तेजाब से नहला कर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद फिर 16 जून 2014 को उनके बड़े बेटे और दोनों भाइयों की हत्या का चश्मदीद गवाह राजीव रौशन की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. अब बुधवार यानी 16 दिसंबर 2020 को चंदा बाबू की हार्ट अटैक से मौत हो गई.

Source : News18 (Vijay Jha)

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