र्तमान सामाजिक परिवेश में जहां लोग अपनों से अलग हो रहे हैं, वहीं बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर के साखमोहन मंदिर के महंत ने अपने 15 महीने की पालतू बिल्ली लुखिया की मौत पर मोक्ष के लिए उसका पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार व श्राद्ध किया। इतना ही नहीं मंदिर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर लुखिया को श्रद्धांजलि भी दी। इसमें साधु संतों के साथ आसपास के लोग शामिल हुए। महंत के इस काम की जमकर चर्चा हो रही है। इस अनोखे पशु प्रेम को इलाके के लोग मिसाल मान रहे हैं।

ठाकुरबाड़ी में हुआ था लुखिया का जन्म 

महंत डॉ. शंभू कुमार ने बताया कि लुखिया का जन्म ठाकुरबाड़़ी में ही हुआ था। जन्म के बाद उसकी मां उसे कहीं ले गई थी। लेकिन किसी ने लुखिया को उसकी मां से अलग कर दिया था। एक दिन रात में वह सड़क पर वर्षा में भींग रही थी। उसे भींगते देख मैं मंदिर में ले आया। मंदिर में ही उसे रखकर उसे पालने लगा और लुखिया नाम दिया।

15 जनवरी को हुई मौत 

महंत ने बताया कि15 जनवरी को लुखिया बीमार हो गई। विभूतिपुर के पशु चिकित्सा पदाधिकारी से संपर्क किया और उनके निर्देशानुसार इलाज कराया, लेकिन उसी रात उसकी मौत हो गई। महंत ने बताया कि मरने के बाद लुखिया का अंतिम संस्कार पूरे विधि विधान से किया। उसे मोक्ष दिलाने के लिए सभी क्रियाक्रम करने के बाद श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इसमें समस्तीपुर जिले के अलावा बेगूसराय के कई साधु संत व मदिरों के महंत शामिल हुए।

बिल्ली के नाम पर बनाएंगे ट्रस्ट 

महंत ने बताया कि लुखिया को जहां दफनाया गया है वहां वे प्रतिदिन शाम में दीप जलाते हैं। अब उसके नाम पर लुखिया सेवा ट्रस्ट का निर्माण करने का संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि इस ट्रस्ट के माध्यम से वे लावारिस बेजुबान जानवरों की सेवा करेंगे। जिस लावारिस जानवर को इलाज की जरूरत होगी उसका इलाज कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। बेजुबान जानवर ही नहीं जो पीड़ित हो उसके उसके लिए प्राथमिक चिकित्सा व सेवा की व्यवस्था हो सके।

Source : Hindustan

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