नगर निगम के ऑटो टिपर घोटाले में विजिलेंस ने तत्कालीन नगर आयुक्त रमेश प्रसाद, एडीएम रंगनाथ चौधरी समेत 7 अभियंता व ऑटोमोबाइल कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। इस मामले में इससे पहले बीते साल 13 जून 2020 को मेयर सुरेश कुमार समेत तीन आरोपियों के खिलाफ विशेष निगरानी न्यायालय में चार्जशीट दायर की गई थी।
इस तरह मामले में निगरानी ने सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर जांच पूरी कर ली है। निगरानी की चार्जशीट के आधार पर अगामी 17 फरवरी को संज्ञान के बिंदु पर न्यायालय में सुनवाई होनी है। इसके बाद मेयर सुरेश कुमार पर भी शिकंजा कस गया है। अगर कोर्ट ने संज्ञान लिया तो उन्हें सरेंडर करना पड़ सकता है।
वहीं दोनों तत्कालीन नगर आयुक्त सेवानिवृत हो चुके हैं। चार्जशीट में 1.72 करोड़ रुपए सरकारी राशि के गबन का आरोप लगाया गया है। पूरे मामले की जांच निगरानी डीएसपी मो. खलील, ओंकारनाथ राय और मनोज कुमार श्रीवास्तव ने की है। निगरानी डीएसपी ने दूसरी चार्जशीट 19 पन्ने में लिखी है। इसके सपोर्ट में 230 पेज के 105 पारा में केस डायरी लिखी है।
कागजी साक्ष्य के अलावा चार्जशीट में 11 लाेगाें काे मुख्य गवाह बनाया गया है। इसमें नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त संजय दूबे, टिपर खरीद टेंडर से जुड़े विकास शाखा के कर्मचारी राजीव रंजन, सुनील कुमार और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े लेखा शाखा के कर्मचारी अखिलेश सिन्हा और दीपेंद्र सिंह ने घाेटाले की पाेल खाेली है।
इन पांचाें लाेगाें के अलावा टेंडर में छांट दिए गए तिरहुत ऑटाे माेबाइल कंपनी के निदेशक संजय गाेयनका काे प्रमुख गवाह बनाया गया है। निगरानी के अधिकारियाें ने चार्जशीट इस तरह पेश किया है कि नगर निगम के चाराें कर्मचारी गवाही से मुकरेंगे ताे खुद भी फंस सकते हैं। क्याेंकि इन चाराें ने ही टिपर खरीद व भुगतान की फाइल डील की थी। चार्जशीट व केस डायरी काे लाल कपड़े में बांधकर निगरानी कोर्ट में दाखिल किया गया है।
एजेंसी से नगर आयुक्त ने मांगी थी घूस
तिरहुत ऑटोमोबाइल मुजफ्फरपुर से नगर निगम 20 ऑटाे टिपर की खरीदारी कर चुका था। दुबारा 50 टिपर खरीदने के टेंडर में सबसे कम कीमत पर टिपर देने के लिए तैयार तिरहुत ऑटोमोबाइल से खरीदारी नहीं की गई। इनके प्राेप्राइटर संजय गाेयनका ने निगरानी काे बताया है कि रमेश रंजन ने प्रति टिपर 15 हजार रुपए रिश्वत मांगी थी।
कोर्ट के संज्ञान पर मेयर को करना होगा सरेंडर
न्यायालय आरोपियों पर संज्ञान लेती है तो मेयर सुरेश कुमार सरेंडर करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मेयर की गिरफ्तारी पर घोटाले की जांच पूरी होने तक रोक लगाई थी। अब चार्जशीट के आधार पर कोर्ट संज्ञान लेगा तो मामले में मेयर को जमानत लेनी होगी। इसके लिए कोर्ट में सरेंडर करने पर जेल भी जाना पड़ सकता है।
क्राइम के सीनियर अधिवक्ता शरद सिन्हा ने बताया कि निगरानी की चार्जशीट में लगाई गई आईपीसी की धाराओं में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
ऑटाे टिपर खरीद का निर्णय क्रय समिति की बैठक में लिया गया, लेकिन दाेष मुझ पर आ गया है। खरीद की प्रक्रिया और कागजात की जांच अधिकारियाें व कर्मचारियाें काे करनी है। इसमें मेरा काेई राेल नहीं है। ऑटाे टिपर खरीद में मुझ पर घाेटाले का आराेप बेबुनियाद है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि न्यायालय में यह आराेप नहीं टिक पाएगा। -सुरेश कुमार, मेयर
इन पर दायर की गई है चार्जशीट
1. रमेश प्रसाद रंजन, तत्कालीन नगर आयुक्त 2. रंगनाथ चौधरी, तत्कालीन एडीएम सह नगर आयुक्त 3. बिंदा सिंह तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, 4. नंद किशोर ओझा तत्कालीन सहायक अभियंता 5. महेंद्र सिंह तत्कालीन सहायक अभियंता 6. मो. क्यामुद्दीन अंसारी तत्कालीन जेई वर्तमान में पथ प्रमंडल गोपालगंज में जेई 7. मोहन हिम्मत सिंगका, मौर्या मोटर्स के मालिक सह निदेशक 13 जून 2020 को इन पर हुई थी चार्जशीट 8. सुरेश कुमार, मेयर नगर निगम 9. भरत लाल चौधरी, तत्कालीन जेई 10. प्रमोद कुमार सिंह, तत्कालीन जेई।
Source : Dainik Bhaskar