अब सिर्फ स्कूल की ही रसोई नहीं गमकेगी बल्कि स्कूली बच्चों के लिए स्वादिष्ट और पौष्टिकता से भरपूर गरमागरम खाना तैयार करने वाले रसोइयों के घर की रसोई भी महकेगी। केंद्र सरकार सरकारी स्कूलों में खाना बनाने वाले देशभर के 25 लाख से ज्यादा रसोइयों (कुक कम हेल्पर) के मानदेय में फिलहाल बढ़ोतरी करने की तैयारी में है। जो कम से कम दोगुनी की जा सकती है। हालांकि इसे तीन गुना तक बढ़ाने का प्रस्ताव है लेकिन इस समय आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसे दोगुना करने की तैयारी है

हर माह इतना बढ़ जाएगा मानदेय

इस योजना पर अमल हुआ तो उन्हें हर माह न्यूनतम दो हजार रुपए का मानदेय मिलेगा। स्कूलों में खाना बनाने वाले इन रसोइयों को मौजूदा समय में सिर्फ एक हजार रुपए ही मानदेय दिया जाता है। जिसमें छह सौ रुपए केंद्र सरकार देती है और बाकी के चार सौ रुपए राज्यों को देने होते हैं। खास बात यह है कि इनके मानदेय में पिछले दस सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। इनके मानदेयों में अंतिम बार बढोत्तरी 2009 में की गई थी।

15वें वित्त आयोग ने की है सिफारिश

हालांकि कुछ राज्यों ने इनकी स्थिति को देखते हुए अपने स्तर पर इनके मानदेय में बढ़ोतरी कर रखी है। यह स्थिति तब है कि जब देश में अकुशल श्रमिकों की भी न्यूनतम मासिक मजदूरी कम से कम दस हजार तय है। हाल ही में 15वें वित्त आयोग ने भी इनके मानदेय में बढ़ोतरी की सिफारिश की है।

शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो स्कूलों में खाना तैयार करने वाले रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी प्रस्तावित है। नए बजट की मंजूरी के बाद इसे लेकर जरूरी निर्णय लिए जाएंगे। स्कूलों में खाना बनाने वाले रसोइयों में 90 फीसद महिलाएं है। ऐसे में सरकार इन महिलाओं को जल्द ही बड़ी खुशखबरी देने की तैयारी में है।

सूत्रों का कहना है कि रसोइयों के काम-काज को और बेहतर बनाने के लिए इन्हें प्रशिक्षण देने की योजना पर भी काम चल रहा है। जिसमें इन सभी को खाने के पोषक तत्वों को सहेजने सहित खाने में और क्या पौष्टिक चीजें शामिल की जा सकती है, इससे भी अवगत कराया जाएगा। गौरतलब है कि मिड-डे मील योजना के तहत स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 12 करोड़ बच्चों को ताजा खाना उपलब्ध कराया जा रहा है।

Input: Dainik Jagran

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