कोरोना का संक्रमण इतनी तेजी से फैल रहा है कि पूरा का पूरा परिवार चपेट में आ जा रहा है। स्थिति यह है कि घर में कोई खाना बनाने वाला भी नहीं बच रहा है। बिना खाये बीमारी से कैसे लड़ा जा सकता है। अधिक समय तक भूखे रहने पर बीमारी और भयावह हो जा रही है। ऐसे ही लोगों की पेट भरने के लिए कुछ महिलाओं ने मदद के हाथ बढ़ाए हैं।

कंकड़बाग की दो बहनों नीलिमा और अनुपमा सिंह और पटना वीमेंस कॉलेज की प्रोफेसर अपराजिता कृष्णा ने मुफ्त में खाना खिलाने का काम शुरू किया है। अपराजिता कृष्णा भौतिकी विभाग की प्रोफेसर हैं। वे बताती हैं कि कॉलेज बंद रहने के कारण मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे। बेटी ने इस तनाव से बाहर निकालने के लिए जरूरतमंद लोगों को खाना बनाकर भेजने को कहा। सिर्फ ट्विटर पर एक मैसज लिखकर डाला।

वह बताती हैं कि गरीब तो कहीं भी मांगकर खा लेता है, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार न मांग कर खा पाता है और न किसी को कुछ कह पाता है। कोरोना ने भी सबसे अधिक इसी वर्ग को प्रभावित किया है। फेसबुक और ट्विटर से मदद मांगी जाती है। घर पर जो भी है वही बनाकर लोगों को पैक कर भेजती हूं। दो दिन से शुरुआत की है। हर दिन 50 पैकेट खाना बनाकर दे रही हूं।

अनुपमा और नीलिमा सिंह पांच दिनों से मुफ्त में खाना खिला रही हैं। वैसे लोग जो कोरोना पॉजिटिव हैं और होम आइसोलेशन में हैं, उनके लिए खाना बनाकर दे रही हैं। अनुपमा बताती हैं कि जो हम खा रहे हैं, वही खिला रही हैं। अनीसाबाद की प्रीति पांच दिनों से मुफ्त में खाना बनाकर खिला रही हैं। गृहिणी होते हुए बिना किसी की मदद के इस विकट समय में लोगों का पेट भरने का काम कर रही हैं।

Input: Live Hindustan

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