कोविड की दूसरी लहर ने लोगों में भय और भ्रम पैदा कर दिया है। दैनिक संक्रमितों के बढ़ते आंकड़े जहां डराते हैं, वहीं इंटरनेट मीडिया पर इससे बचने के लिए बताए जा रहे तरह-तरह के अपुष्ट उपाय लोगों को भ्रमित करते हैं। कोविड वैक्सीन को लेकर भी कुछ लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं और सवाल हैं। इनका समाधान किया है डॉ. भरत गोपाल ने जो फोर्टिस अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट (पल्मोनोलॉजी) हैं।

कौन सी वैक्सीन उपलब्ध हैं?

-देश में फिलहाल कोविशील्ड व कोवैक्सीन उपलब्ध हैं।

दोनों खुराक के बीच का सही अंतराल क्या है?

-कोवैक्सीन को चार से छह सप्ताह के बीच लगाने की अनुशंसा है, जबकि कोविशील्ड को चार से आठ सप्ताह के बीच। हालांकि, अध्ययन बताते हैं कि 12 हफ्ते तक इनका इस्तेमाल सुरक्षित और प्रभावी है। 19 फरवरी को लांसेट में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया गया था कि कोविशील्ड की दो खुराक के बीच अगर 12 हफ्ते का अंतराल रखा जाता है तो वह 81.3 फीसद तक असरदार हो जाती है, जबकि छह सप्ताह से कम अंतराल पर 55.1 फीसद ही प्रभावी रहती है।

क्या दोनों बार अलग-अलग वैक्सीन लगवा सकते हैं?

-बिल्कुल नहीं। ये दोनों अलग-अलग प्रकार की वैक्सीन हैं। एक व्यक्ति को कतई दोनों वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए। दूसरी खुराक भी उसी वैक्सीन की होनी चाहिए, जिसकी पहली खुराक ली गई हो।

कोरोना से उबरने के बाद वैक्सीन के लिए कितना इंतजार करना चाहिए?

-स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोरोना संक्रमण से उबरने वाले व्यक्ति को कम से कम 14 दिनों तक वैक्सीन नहीं लेनी चाहिए। इसके बाद वैक्सीन ले सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल (सीडीसी) कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने के 90 दिनों बाद ही वैक्सीन लगाने की सलाह देता है।

यह कैसे संभव है कि घर में एक व्यक्ति तो कोरोना संक्रमित है और उसके संपर्क में आने के बावजूद अन्य की रिपोर्ट निगेटिव आ रही है?

-पहला कारण है कि रिपोर्ट ही गलत हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमित एक तिहाई लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। अन्य कारणों में वैसे लोग हो सकते हैं जिन्होने कोरोना वैक्सीन नहीं ली हो और पूर्व में कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हों। भले ही उनमें संक्रमण के लक्षण नहीं दिखाई दिए हों।

होम क्वारंटाइन अथवा अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत कब पड़ती है?

-देश में ज्यादातर मामले ऐसे हैं जिनमें कोरोना के लक्षण बहुत सामान्य हैं और घर पर क्वारंटाइन के जरिये बीमारी को मात दे सकते हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत ही नहीं है। केवल जिन्हें खतरा ज्यादा है, खासकर सह रुग्णता वालों को हल्के लक्षणों के बाद अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है।

इंटरनेट मीडिया पर दी जाने वाली इलाज संबंधी सलाह कितनी कारगर है?

-उन पर बिल्कुल ही भरोसा न करें। डॉक्टर के परामर्श से ही दवा लें और अन्य उपायों को अपनाएं। बिना जाने इलाज करना बीमारी को बढ़ाना है।

क्या पालतू पशुओं को भी कोरोना हो सकता है?

-सीडीसी के अनुसार दुनिया में ऐसे मामले कम ही आए हैं। पालतू पशुओं में तो कोरोना संक्रमित के करीबी संपर्क से यह बीमारी हो सकती है, लेकिन पशुओं से मनुष्यों में इस बीमारी के प्रसार के अभी प्रमाण नहीं मिले हैं।

संदिग्ध लक्षण दिखने के बाद कोविड-19 की जांच के लिए कितना इंतजार करना चाहिए?

-बिल्कुल ही इंतजार नहीं करना चाहिए। संदिग्ध लक्षणों के दिखने के बाद तत्काल जांच करवाएं। जब लक्षण दिखें उसी दिन से खुद को 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन कर लें। पॉजिटिव रिपोर्ट आने के 10 दिनों बाद तक अथवा लगातार तीन दिन बुखार न आने तक खुद को क्वारंटाइन करें।

पूर्व में कोरोना संक्रमित हो चुके लोगों को भी क्या वैक्सीन लेने की जरूरत है?

बिल्कुल। अगर आप पहले कोरोना संक्रमित हो चुके हों तब भी वैक्सीन की दोनों खुराक लेने की सलाह दी जाती है। इससे आपके शरीर में वायरस के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित होगी।

Source : Dainik Jagran

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