देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन का असर खेती पर भी जबर्दस्त पड़ा है। भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसी तरह वे उपज नष्ट करने लगे हैं। बिहार के किसानों ने वाजिब मूल्य नहीं मिलना के कारण टॉम और उसकी फसल नष्ट करना शुरू कर दिया है। मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड के मझौलिया पंचायत क्षेत्र में किसानों ने कई कैरेट टमाटर सड़कों पर फेंक दिए और उन्हें ट्रेक्टरों से रौंद दिया।

किसानों के अनुसार 10 बीघा जमीन में टमाटर उगाने की लागत लगभग दो लाख रुपये आती है, लेकिन मौजूदा हालात में उनकी लागत में से 70 हजार रुपये भी नहीं मिल रहे हैं। इसी तरह मुजफ्फरपुर के किसानों के एक समूह ने अपनी टमाटर की उपज का नष्ट कर दिया। इन टमाटरों पर चाल चलवा दिया गया।

किसानों का कहना है कि एक कैरेट में 25 किलो टमाटर आते हैं। इनकी कीमत आम दिनों में औसत 350 रुपये मिलती है। कोरोना के कारण लॉकडाउन से टॉम अन्य शहरों में नहीं हो पा रही है। गांवों में ही माल बेचना पड़ रहा है। जो भी पोस्ट के रूप में वह पोस्ट होता है, जब वह 20 फरवरी को पोस्ट होता है।

देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना के कारण लागू लॉकडाउन का असर खेती पर भी जबर्दस्त पड़ा है। भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसी तरह वे उपज नष्ट करने लगे हैं। बिहार के किसानों ने वाजिब मूल्य नहीं मिलना के कारण टॉम और उसकी फसल नष्ट करना शुरू कर दिया है। मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड के मझौलिया पंचायत क्षेत्र में किसानों ने कई कैरेट टमाटर सड़कों पर फेंक दिए और उन्हें ट्रेक्टरों से रौंद दिया। किसानों के अनुसार 10 बीघा जमीन में टमाटर उगाने की लागत लगभग दो लाख रुपये आती है, लेकिन मौजूदा हालात में उनकी लागत में से 70 हजार रुपये भी नहीं मिल रहे हैं। इसी तरह मुजफ्फरपुर के किसानों के एक समूह ने अपनी टमाटर की उपज का नष्ट कर दिया। इन टमाटरों पर चाल चलवा दिया गया।





