तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया हत्याकांड में उम्रकैद की सजा प्राप्त पूर्व सांसद व बिपीपी प्रमुख आनंद मोहन की रिहाई की मांग अब जोर-शोर से उठने लगी है. आज मंगलवार को पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित आवास पर उनके पुत्र विधायक चेतन आनंद और पुत्री सुरभि आनंद ने हाथ में तख्ती को लेकर उपवास रखा और कहा- मेरे पापा को रिहा करो. बता दें कि चेतन आनंद वर्तमान में शिवहर के आरजेडी विधायक हैं. दूसरी ओर, आज पूरे बिहार में उनके समर्थकों ने उपवास रखा.

दरअसल, तत्कालीन हत्याकांड में पूर्व सांसद आनंद मोहन की सजा 18 मई को ही पूरी हो गई है, लेकिन लॉकडाउन व अन्य तकनीकी कारणों से अब तक उन्हें रिहा नहीं किया गया है. ऐसे में अब उनके परिवार के लोग और समर्थक आनंद मोहन की रिहाई की मांग कर रहे हैं. वहीं, न्याय-मंच बिहार के संयोजक मनोज लाल दास “मनु” और संस्थापक सदस्य पवन राठौर ने बयान जारी कर कहा कि पूर्व सांसद आनंद मोहन उस गुनाह की सजा काट रहे हैं, जो उन्होंने की ही नहीं. एक झूठे मामले में निर्दोष होते हुए भी भारतीय न्याय-व्यवस्था में आस्था रखते हुए पूरे धैर्य संयम और शालीनता से उन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली. सजा अवधि पूरी होने के बाद भी वे सहरसा मंडल कारा में कैद हैं. उनकी रिहाई की मांग को लेकर उनके समर्थकों ने उपवास रखा.

मंच के संस्थापक पवन राठौर ने कहा कि पूर्व सांसद आनंद मोहन के जेल के काल-खंड को देखा जाय तो इसमें उन्होंने कई किताबों की रचनाएं कीं, जिसमें से पर्वत पुरुष दशरथ मांझी पर लिखी गयी कहानी को सीबीएसई बोर्ड ने आठवीं की हिन्दी पुस्तक “मधुरिमा” में शामिल भी किया है, जिसको पढ़कर देश के बच्चे लाभ उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ‘कोरोना गाइड’ लाइन के दिशा-निर्देशों के आलोक में पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई का मार्ग प्रशस्त करें.

Source : Live Cities

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