राज्य सरकार ने पहले निजी कंपनी पीओसिटी सर्विसेज को 29 करोड़ में आरटीपीसीआर जांच का ठेका दिया और अब टेस्टिंग वैन का टारगेट पूरा कराने के लिए अपने ही कर्मचारियों का जबरन जांच भी करवा रही है। इतना ही नहीं, भागलपुर सहित कई जिलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कलेक्ट सैंपल कंपनी को दिए जा रहे हैं। पटना में तो टेस्टिंग वैन का डेली टारगेट (900-1000) पूरा करने के लिए सरकारी अफसर मातहतों के लिए आदेश निकाल रहे हैं। बिक्रम के बीईओ ने पत्र जारी कर कहा कि सभी सीआरसीसी, हेडमास्टर, शिक्षक, शिक्षा सेवक, तालिमी मरकज, रसोइया, आरटीपीसीआर जांच कराना तय करेंगे।

इसकी रिपोर्ट भी बीआरसी में देंगे। पीएचसी बिक्रम के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की ओर से बीईओ को 14 जून को पत्र लिखकर आरटीपीसीआर जांच के लिए टेस्टिंग वैन के बुधवार को प्रखंड में पहुंचने की जानकारी दी गई थी। पत्र में यह भी लिखा गया था कि 900 जांच का टारगेट दिया गया है, इस उपलब्धि को प्राप्त करने के लिए सहयोग अपेक्षित है।

इस पत्र पर बीईओ ने शिक्षकों व अन्य लोगों के लिए जांच कराना अनिवार्य कर दिया। आदेश मिलते ही शिक्षक तथा स्कूलों में काम करनेवाले अन्य लोग भागे-भागे जांच कराने पहुंचे। दूसरी ओर, कंपनी का कहना है कि उसे 18 सितंबर 2020 को महाराष्ट्र सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया लेकिन 13 अक्टूबर 2020 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्टे दे दिया।

जबरन जांच करवाना गलत: डीएम
जबरन आरटीपीसीआर जांच कराना पूरी तरह से गलत है। इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। यह लोगों के स्वेच्छा पर निर्भर है कि वे जांच कराएंगे या नहीं। लोगों को जागरूक कर टीकाकरण बढ़ाने के लिए निर्देश दिया गया है न कि आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए। -डॉ. चंद्रशेखर सिंह, डीएम, पटना
वैन से कोरोना की हो रही आरटीपीसीआर जांच को लेकर अलग से कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। जिस क्षेत्र में गाड़ी जा रही है, वहां पहले से ही लोगों के बीच आशा आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। ताकि लोग लाभांवित हों।-डॉ. विभा कुमारी, सिविल सर्जन, पटना
Input: dainik bhaskar





