कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में झूठ बोलकर सरकारी नौकरी लेने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. ये घटना 11 साल पहले यानी 2010 की है. एक रेल हादसे में मारे गए सभी लोगों के परिवार के एक सदस्य को सरकार ने रेलवे में नौकरी दी थी. आरोप है कि इसी दौरान इस शख्स के परिवार ने हादसे में अपने बेटे की मौत की झूठी सूचना देकर सरकारी नौकरी ले ली थी. उनके परिजनों ने दावा किया था कि वो मर चुका है. लिहाजा उसके एवज में उन्हें नौकरी और मुआवजा भी मिला था.

सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि मरने वाले व्यक्ति की बहन और उनके पिता को मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है. व्यक्ति की हादसे में कथित मौत के बाद उसकी बहन को नौकरी मिली थी. दक्षिण पूर्व रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि कोलकाता के एक व्यक्ति ने दावा किया कि उनका बेटा इस हादसे में मारा गया है और डीएनए नमूने के जरिए उन्होंने शव की पहचान की थी.

CBI कर रही है जांच
समाचार एजेंसी पीटीआई को एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उस व्यक्ति की बहन पूर्वी रेलवे के सियालदाह मंडल के सिग्नलिंग विभाग में काम कर रही है. दक्षिण पूर्व रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ये शिकायत मिली कि वह व्यक्ति जीवित है जिसके बाद रेलवे के सतर्कता विभाग ने जांच की और आरोप में उन्हें कुछ पुख्ता तथ्य मिले. इसके बाद मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गयी.

साल 2010 की घटना
बता दें कि मई 2010 में हावड़ा-मुंबई जनेश्वरी एक्सप्रेस की प्रदेश के झाड़ग्राम के सरडीहा में सामने से आ रही मालगाड़ी से टक्कर हो गयी थी. जिसके बाद एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे पटरी से उतर गये थे और इस हादसे में कम से कम 148 यात्रियों की मौत हो गयी थी. आरोप लगा था कि रेल पटरियों को नुकसान पहुंचाए जाने के कारण यह दुर्घटना हुई है क्योंकि इलाका उस वक्त माओवादी हिंसा की चपेट में था. हादसे के बाद रेलवे ने मरने वाले के परिजनों को आर्थिक मुआवजे के अलावा परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी दी थी.(भाषा इनपुट के साथ)





