पटना. बिहार पुलिस के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey)  एक बार फिर से वह चर्चा में हैं. इस बार वे एक कथावाचक के अवतार में नजर आ रहे हैं. गुप्तेश्वर पांडेय ने एक बैनर के माध्यम से श्रीमद भागवत वचन अमृत की जानकारी साझा की. उस बैनर में जहां एक तरफ राधा कृष्ण की तस्वीर लगाई गई है, वहीं दूसरी तरफ गुप्तेश्वर पांडेय की तस्वीर लगी है. साथ ही कथा की अवधि ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी से हरि इच्छा तक बताई गई है. बैनर में यह भी बताया गया है कि  इस कथा का प्रसारण ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा. बैनर के अंत में जूम आईडी और उसका पासवर्ड भी दिया गया है. जो लोग भी इस कथा को सुनना चाहते हैं वे इस आईडी और पासवर्ड के साथ लॉग इन कर सकते हैं.

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब वह सुर्खियों में रहे हों या अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई हो. इससे पहले भी पांडे ने अपनी नौकरी से वीआरएस ले ली थी और बिहार डीजीपी के पद से इस्तीफा देने के बाद जेडीयू की सदस्यता ले ली थी. लेकिन, टिकट नहीं मिला तो वह चुनाव नहीं लड़ सके. अब वो कथावाचक बन गए हैं.

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में मीडिया में छाए रहे

बीते वर्ष अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में, रिया  की ‘औक़ात’ वाले बयान देने और एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार को लेकर चर्चा में रहे थे. इसी दौरान उन्होंने मुंबई पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए थे और तब मीडिया की सुर्खियों में रहे थे. बिहार पुलिस के साथ कथित दुर्व्यवहार पर उन्होंने काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. इसके बाद उन्होंने ही सुशांत सिंह मामले की सीबीआई जांच करवाने में अहम भूमिका निभाई थी.

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बिहार के 26 जिलों में किया काम
1987 बैच के आईपीएस गुप्तेश्वर पांडेय बिहार में अलग-अलग पदों पर उसके 26 जिलों में काम कर चुके हैं. उनका जन्म बक्सर ज़िले के एक छोटे से गांव गेरूआ में हुआ था. किसान पिता जगदीश पांडेय और माता गंगाजला देवी के यहां जन्मे गुप्तेश्वर पांडेय के दो भाई और एक बहन हैं. गुप्तेश्वर पांडेय की पत्नी चिंता देवी गृहणी हैं. उनके पाँच बच्चे हैं जिसमें तीन बेटियां और दो बेटे हैं.

बेगूसराय में किए 42 एनकाउंटर

पुलिस में रहते हुए कई जिलों में उन्होंने कम्युनिटी पुलिसिंग के ज़रिए प्रयोग किए. ख़ासतौर पर 1993 -94 में बेगूसराय और 1995-96 में जहानाबाद ज़िले में उनकी पोस्टिंग चर्चा में रही. उस वक़्त बेगूसराय बहुत संवेदनशील जिला था और सात से आठ महीनों में 42 अपराधियों के एनकांउटर किए. लेकिन, गुप्तेश्वर पांडेय सबसे ज़्यादा विवादित रहे 2012 में मुज़फ़्फ़रपुर की 13 साल की बच्ची नवरुणा हत्याकांड के मामले में. साल 2014 में गुप्तेश्वर पांडे और बिहार पुलिस के दो कर्मियों के खिलाफ सीबीआई ने नवरूणा केस की जांच की थी.

भोजपुरी गायिका पर रुपये लुटाते दिखे थे

गुप्तेश्वर पांडेय साल 2009 में भी तब खूब चर्चा में रहे जब उन्होंने बीजेपी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस के लिए आवेदन दिया था. लेकिन उन्हें बक्सर से बीजेपी की टिकट नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने अपना आवेदन वापस ले लिया. इसके बाद साल 2010 में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वो भोजपुरी गायिका देवी पर रुपये लुटाते दिखे थे.

पसंद है रॉबिनहुड की छवि

गुप्तेश्वर पांडेय सोशल मीडिया पर चुलबुल पांडेय के तौर पर गुप्तेश्वर पांडेय मशहूर हैं. माना जाता है कि वे रॉबिन हुड की छवि को बेहद पसंद करते हैं. हाल में ही दीपक ठाकुर का उनपर  बनाया गाना ‘ राबिन हुड बिहार के’ भी काफी चर्चा में रहा था. इस गाने के बोल थे- माफ़िया अपराधी मांगे दुआ, हिल जाए इलाक़ा इनकी एक दहाड़ से. माना जा रहा है कि चुनाव से पहले उन्होंने अपनी छवि बनाने के लिए ऐसा किया था, लेकिन टिकट नहीं मिला तो चुनाव ही नहीं लड़ पाए. अब वह एक बार फिर कथावाचक बनकर सुर्खियों में हैं.

Source : News18

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