लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) के प्रदेश मुख्यालय में सोमवार को आयोजित रामविलास पासवान की जयंती समारोह में विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं व नेताओं की भागीदारी हुई। अपने बड़े भाई रामविलास के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित करने के दौरान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संसदीय दल के नेता पशुपति कुमार पारस भावुक हो गए। कहा कि उन्हें किसी पद-प्रतिष्ठा की जरूरत नहीं है। बड़े भाई की बदौलत और समर्पित कार्यकर्ताओं के स्नेह से जीवन में बहुत सम्मान मिला। आठ बार विधायक और चार बार मंत्री बना। अब मेरा राजनीतिक सफर अंतिम पड़ाव पर है। मुझे आने वाली पीढ़ी और समॢपत कार्यकर्ता कभी माफ नहीं करते, यदि मैं पार्टी को बर्बाद होते हुए मूकदर्शक बना देखता रहता।

चिराग की वजह से आंतरिक लोकतंत्र था समाप्त

भतीजे पर हमला बोलते हुए पारस ने कहा कि चिराग के एकतरफा फैसले, अपमानजनक व्यवहार और अहंकारी आचरण से आहत हुआ। चिराग के रवैये से पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र समाप्त हो चुका था। बिहार में पार्टी का अस्तित्व खतरे में था, मैंने पार्टी के अस्तित्व को बचाया है। मैंने जो फैसला लिया, वह रामविलास पासवान की आत्मा की शांति के लिए लिया। उनकी विचारधारा और सिद्धांत को मिलकर आगे बढ़ाना है। उन्होंने रामविलास पासवान को भारत रत्न देने की मांग प्रधानमंत्री से की।

समारोह में पार्टी प्रवक्ता श्रवण कुमार अग्रवाल ने बताया कि पूरे प्रदेश भर से छह हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं एवं नेताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद सूरजभान सिंह, सांसद चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी और चंदन सिंह के साथ महासचिव उषा शर्मा, वीरेश्वर सिंह, पूर्व विधायक सुनील पाण्डेय, अनिल चौधरी, दिवंगत रामचंद्र पासवान के बड़े पुत्र कृष्ण राज व पूर्व महासचिव केशव सिंह, अंबिका प्रसाद बीनू समेत अन्य नेताओं ने रामविलास पासवान की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

Source : Dainik Jagran

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