आज अषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुप्त नवरात्रि का पहला दिन है. गुप्त नवरात्रि के दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा अर्चना की जाती है. गुप्त नवरात्रि के पहले दिन भक्त मां कालिका की आराधना कर रहे हैं. माता कालिका (Maa Kaalika) 10 महाविद्याओं में से एक हैं. मां काली के 4 रूप हैं- दक्षिणा काली, शमशान काली, मातृ काली और महाकाली. माता ने महिषासुर, चंड, मुंड, धूम्राक्ष, रक्तबीज, शुम्भ, निशुम्भ. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार- मां कालिका कलियुग की जाग्रत देवी मानी जाती हैं.बता दें कि, साल में 2 बार गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) भी आती है जो माघ और आषाढ़ के महीने में आती है. आइए जानते हैं घट स्थापना का मुहूर्त और धार्मिक मान्यताएं…

घट स्थापना और पूजा का शुभ मुहूर्त:
आज गुप्त नवरात्रि की साधना से पहले साधक घटस्थापना करेंगें. घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 9:08 से लेकर दोपहर 12:32 तक है. इसके अलावा दोपहर 12:05 से 12:59 के बीच का समय घटस्थापना के लिए शुभ है.अष्टमी 17 जुलाई को है और नवमी 18 जुलाई को पड़ेगी.

गुप्त पूजा का फल दोगुना:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि को गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे लेकर कई तरह के रहस्य बरकरार हैं और इस दौरान तंत्र मंत्र (Tantra Mantra) की सिद्धि भी की जाती है. साथ ही इस दौरान मां दुर्गा की पूजा को जितना गुप्त तरीके से किया जाता है, पूजा का फल उतना ही अधिक मिलता है. मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष उपायों को करने से मां दुर्गा (Goddess Durga) प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं.

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना करता है उसके रोग-दोष मिट जाते हैं. तांत्रिकों के लिए यह साधना विशेष फलदायी है. यह भी माना गया है कि इस साधना से कई गुप्त शक्तियों की प्राप्ति होती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
Input: news18





