कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में वे लोग भी संक्रमित हो गए, जिन्होंने वैक्सीन की दोनों या एक डोज ली थी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अध्ययन से साफ हुआ है कि इसके लिए मुख्यतौर पर कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट जिम्मेदार है। हालांकि, वैक्सीन लेने वालों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत बहुत कम आई और मौतें भी न के बराबर हुईं।

आइसीएमआर के एक वरिष्ठ विज्ञानी ने बताया कि अध्ययन में महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, मणिपुर, असम, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, पुडुचेरी, दिल्ली, बंगाल और तमिलनाडु से कुल 677 ऐसे केस लिए गए, जिन्होंने वैक्सीन की कोई न कोई डोज ले रखी थी। इनमें से 71 ने कोवैक्सीन, 604 ने कोविशील्ड और दो ने चीनी वैक्सीन सिनोफार्म लगवाई थीं। अध्ययन में पाया गया कि वैक्सीन लेने वालों में से 86 फीसद से अधिक संक्रमण डेल्टा वैरिएंट के कारण हुआ है, जिसे भारत में दूसरी लहर के लिए मुख्यतौर पर जिम्मेदार माना जाता है। इसके अलावा कप्पा और अल्फा वैरिएंट भी कुछ मामलों में पाए गए।

विज्ञानी के अनुसार अध्ययन से एक बार फिर साबित हुआ है कि वैक्सीन भले ही संक्रमण रोकने में पूरी तरह से सफल नहीं हो, लेकिन उसकी गंभीरता को कम करने में कारगर है। अध्ययन में शामिल 677 मामले में सिर्फ तीन की मौत हुई, जो कुल संक्रमितों का 0.04 फीसद है। जबकि कोरोना के कारण मृत्युदर अब भी 1.33 फीसद बनी हुई है। इसी तरह से 677 संक्रमितों में से केवल 67 को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ी, जो कुल संक्रमितों का 9.9 फीसद है।

संक्रमण के हल्के लक्षण मिले

आइसीएमआर ने अध्ययन में यह भी जानने की कोशिश की कि वैक्सीन लेने के बाद संक्रमित होने वालों में कौन-कौन से लक्षण देखे गए। इसमें पाया गया कि सबसे अधिक 69 फीसद में बुखार, 56 फीसद में सिरदर्द व जी-मिचलाना, 45 फीसद में खांसी, 37 फीसद में गले में दर्द, 22 फीसद में स्वाद और गंध का चले जाना, छह फीसद ने दस्त, छह फीसद ने सांस लेने में तकलीफ और एक फीसद में आंख में जलन व लाली की शिकायत देखने मिली है।

Input: dainik jagran

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