बिहार के समस्तीपुर में अपनों की कंपा देने वाली क्रूरता का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां घरवालों ने एक दिन की नवजात बच्ची के मुंह पर टेप लगाया। फिर उसे प्लास्टिक की बोरी में भरकर पानी से भरे गड्ढे में फेंक दिया। लेकिन कहते हैं न जाको राखे साइयां, मार सके न कोय…बोरी में पानी भर जाने से बच्ची के मुंह पर लगा टेप हट गया। इससे उसके रोने की आवाज निकलने लगी। तभी वहां से गुजर रही एक महिला को बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। उसने प्लास्टिक की बोरी खोलकर देखा तो उसमें रोती हुई बच्ची मिली। फिलहाल, बच्ची अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत स्थिर है।

थोड़ी देर होती तो जा सकती थी बच्ची की जान
मामला गोपालपुर पंचायत के वार्ड-12 के झउड़ी गांव का है। बच्ची रविवार सुबह बूढ़ी गंडक वाटरवेज के पानी भरे गड्ढे में मिली। सुबह 5 बजे गांव की रहने वाली आशा देवी घर से पशुशाला जा रही थीं। तभी उन्हें बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी।
रोने की दिशा में जाकर देखा तो गड्ढे के अंदर तैर रही प्लास्टिक की बोरी से आवाज सुनाई दी। आशा देवी ने उस बोरी को पानी से निकाला। खोला तो उसमें बच्ची थी। आशा देवी कहती हैं कि अगर थोड़ी देर हो जाती तो शायद बच्ची की जान जा सकती थी। मुंह पर टेप बांधकर फेंकने वाले ने यह सोचा कि ये बच्ची तो मर जाएगी। लेकिन ऊपर वाले ने इसे बचाने के लिए मुझे भेज दिया।
पानी भरे गड्ढे में नवजात बच्ची मिलने की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण जुट गए। तुरंत पीएचसी प्रभारी को सूचना दी गई। फिर एम्बुलेंस मंगाकर बच्ची को कल्याणपुर पीएचसी में एडमिट कराया गया। वहां बच्ची का चेकअप करते हुए टीकाकरण किया। वहीं बच्ची को कपड़े भी पहनाए गए।

थोड़ी देर पहले ही बच्ची को फेंकने की आशंका
बच्ची को किसने फेंका? क्यों फेंका? यह तो अभी पता नहीं लग पाया है। लेकिन, डॉक्टरों का अनुमान है कि जिस वक्त आशा देवी को बच्ची मिली उसके थोड़ी देर पहले ही बच्ची को फेंका गया होगा। वरना, पानी भरने से बच्ची की जान जा सकती थी। पुलिस भी इस मामले में आसपास के गांव की आशा बहुओं व नर्सिंग होम में जांच पड़ताल कर रही है। ताकि बच्ची को फेंकने वालों का पता लग सके।
बच्चों को हमें दें, आपकी पहचान नहीं पूछी जाएगी
बाल कल्याण अधिकारी नौशाद रजा ने बताया कि समाज में बच्चों खासकर लड़कियों को नवजात रहते ही फेंका जा रहा है। इसका कारण नवजात का मेडिकल अनफिट होना भी रहता है। बच्चों को ऐसे न फेंकें। उसे दुधपुरा दुर्गा मंदिर के पास मौजूद विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में दें। आपकी पहचान नहीं पूछी जाएगी।
Source : Dainik Jagran




